विश्व गौरैया दिवस विशेष: पक्षियों की दुआओं का ही असर है कि उनकी बेटी का कैंसर दूर हो गया
हिसार (सच कहूँ/मुकेश)। Vishva Gauraiya Divas: जहां एक ओर गौरैया जैसे पक्षी धीरे-धीरे शहरी जीवन से गायब होते जा रहे हैं, वहीं हांसी के नजदीकी गांव बडसी की 45 वर्षीय पूनम ओला पिछले करीब 8 वर्षों से इन्हें बचाने की मुहिम में जुटी हुई हैं। उन्होंने अपने जीवन को पक्षियों और बेजुबान जानवरों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। पूनम ओला बताती हैं कि उनकी बेटी को ब्लड कैंसर हो गया था। इस कठिन दौर ने उनके जीवन की सोच को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने बेजुबान जीवों के प्रति दया और करुणा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। Hisar News
उनका मानना है कि पक्षियों की दुआओं का ही असर है कि उनकी बेटी आज पूरी तरह स्वस्थ होकर ग्राफिक डिजाइनर के रूप में काम कर रही है। पूनम पिछले कई वर्षों से पक्षियों के लिए घोंसले बनाने का कार्य कर रही हैं। सामान्य दिनों में वह लकड़ी के घोंसले बनाती हैं, जबकि गर्मियों में मिट्टी के घोंसले तैयार करती हैं ताकि पक्षियों को ठंडक मिल सके। उन्होंने अपने घर पर करीब 15 पेड़ लगाए हुए हैं, जिन पर 500 से अधिक बर्ड हाउस लगाए गए हैं। इसके अलावा वह अनाथ आश्रम, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में जाकर घोंसले बनाने की वर्कशॉप भी आयोजित करती हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ सकें।

पूनम अपने खर्चे पर ही तैयार करती हैं बर्ड हाउस | Hisar News
पूनम ओला अपने खर्चे पर ही बर्ड हाउस तैयार कर लगवाती हैं। हालांकि कई बार कुछ संस्थाएं उन्हें आर्थिक सहयोग भी प्रदान करती हैं। उन्होंने हौसलों की उड़ान नाम से एक एनजीओ की स्थापना भी की है और इसी नाम से एक पुस्तक लिखी है, जिसमें उनके संघर्ष और सेवा की कहानी दर्ज है। इसके साथ ही वह सैकड़ों किताबें भी दान कर चुकी हैं और समाज सेवा के अन्य कार्यों में भी सक्रिय हैं। पक्षियों के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने हजारों रुपये वेतन वाली अपनी नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह इस सेवा में जुट गईं।
मां से मिली प्रेरणा को आगे बढाने का कर रही काम
उनके परिवार में पति, बेटा विश्वास और बेटी खुशी हैं। उनके पति एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और परिवार उनका पूरा सहयोग करता है। पूनम बताती हैं कि उन्हें पक्षियों की सेवा की प्रेरणा अपनी मां से मिली, जो पहले से ही इस कार्य में रुचि रखती थीं। आज पूनम ओला का यह प्रयास न केवल गौरैया संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो एक व्यक्ति भी बड़ा बदलाव ला सकता है। Hisar News















