जब ‘‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’’ के नारे से मृत देह में आ गई जान

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पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का हर कार्य मानवता भलाई को समर्पित रहा है। जब भी चाहे देश की बात हो या किसी जरूरतमंद की मदद की, आपजी ने सर्वप्रथम मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। मानवता पर अनगिनत उपकार करने के बावजूद आज तक आपजी ने इसे कभी नहीं जताया। साध-संगत के अनेक भारी कर्मों को काटकर आपजी ने उनके जीवन को खुशियों से महकाया है। सतगुरु जी के उपकार की एक ऐसी ही सच्ची साखी आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं।

प्रेमी धर्मवीर गाँव खिन्दौड़ जिला मेरठ (यूपी) से सर्व-सामर्थ सतगुरु जी की महान शक्ति का एक प्रत्यक्ष करिश्मा इस प्रकार बयान करता है :-

बात अप्रैल 1993 की है। उन दिनों प्रेमी धर्मवीर कुछ दिनों के लिए डेरा सच्चा सौदा शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) में सेवा पर आया हुआ था। अचानक पीछे से उसके बुजुर्ग पिता जी की तबीयत खराब हो गई और वो चोला छोड़ गए। जैसे ही परिवार वालों को इस बारे में पता चला तो घर में रोना-पीटना शुरू हो गया, जिससे आस-पड़ोस के काफी लोग उनके घर पर इकट्ठे हो गए। इस दु:ख की घड़ी के चलते परिवार वालों ने उसी समय अपने सभी रिश्तेदारों को शोक समाचार भिजवा दिया और धर्मवीर को भी यूपी दरबार से घर बुला लिया।

चोला छोड़ने के बाद धर्मवीर के पिता जी को नीचे जमीन पर उतार लिया गया। उनके रिश्तेदार तथा आस-पड़ोस के कुछ लोग मृतक देह के चारों तरफ बैठ गए। उनमें से कुछ लोग अफसोस में डूबे हुए थे। वहीं कुछ उस दिवंगत आत्मा के गुणों को लेकर आपस में बातें कर रहे थे और घर में माता-बहनों और परिजनों का रोना-पीटना जारी था।

शोक की इस घड़ी के बीच तभी अचानक धर्मवीर का बेटा जितेन्द्र उठा और कमरे में से पूज्य परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का पावन स्वरूप उठा लाया। तब वहां मौजूद सभी लोग उस मासूम को बड़े ध्यान से देखने लगे। जितेन्द्र पूजनीय परम पिता जी का स्वरूप (फोटो) लेकर अपने दादा जी की पार्थिव देह के पास आकर बैठ गया। वो उनके कान में जोर से ‘‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’’ का नारा बोलकर कहने लगा, ‘‘दादा! तुम भी सतगुरु का नारा लगाओ और परम पिता जी के दर्शन कर लो।’’ इतने में बुजुर्ग के मृतक शरीर में कुछ हरकत महसूस हुई। हरकत देख वहां मौजूद लोगों ने उनके मुँह में पानी डाला तो वो उठकर बैठ गए तथा ‘‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’’ का नारा लगाने लगे।

धर्मवीर बताते हैं कि उनके पिता जी ने बताया कि मैं परम पिता जी के पास था और पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने ही मुझे जिन्दा किया है। कुल मालिक का वह अद्भुत चमत्कार देखकर सभी लोग हैरान रह गए। वहां मौजूद लोगों में से कुछ ऐसे भी थे, जो नाम की महान शक्ति को नहीं मानते थे। वो अक्सर निंदा-चुगली ही किया करते थे। लेकिन कुल मालिक की रहमत के उस हैरान कर देने वाले साक्षात् सच को देखकर इतने प्रभावित हुए कि वो भी पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की महिमा गाने लगे।

पूज्य सतगुरु जी की दया मेहर से उनमें से किसी के पास भी किन्तु – परन्तु करने की लेश मात्र भी गुंजाइश नहीं थी। क्योंकि उन सभी उपस्थित लोगों ने प्रभु परमात्मा का वह अलौकिक खेल स्वयं अपनी आँखों से सामने देख लिया था। वाली दो जहान पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के उस अलौकिक करिश्में से प्रभावित होकर गांव के बहुत से जीवों ने अगले मासिक रूहानी सत्संग पर आकर ही नाम दान प्राप्त कर लिया। उन अधिकारी जीवों में से कुछ वे रिश्तेदार भी थे, जो पहले सतगुरु जी के मार्ग के हमेशा उल्ट चला करते थे। उस गांव के बहुत से सूझवान लोग अब भी सतगुरु जी की उस अद्भुत लीला का जिक्र करना नहीं भूलते।

उपरोक्त करिश्में के संबंध में धर्मवीर ने जब पूज्य हजूर पिता जी के पवित्र चरण कमलों में प्रार्थना की तो वाली दो जहान दातार जी ने अपने पवित्र मुख से फरमाया, ‘‘भाई! सतगुरु जी का नारा वैसे ही नहीं लगाना। किसी विशेष अवसर पर अथवा मालिक ने अपनी ऐसी रूहों को प्रभु-भक्ति में लगाना हो तब धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा का यह नारा लगवाना पड़ता है।’’

इससे स्पष्ट है कि पूर्ण सतगुरु सर्व-सामर्थ हैं। वह स्वयं कुल मालिक हैं। सतगुरु के नारे का तो बहाना बना। असल में सतगुरु जी ने अपनी अपार कृपा-दृष्टि व रहमत से लाखों पापी, अपराधी तथा कम बुद्धि जीवों को नाम दान बख्श कर संसार सागर तथा चौरासी के चक्कर से मुक्त किया है और लगातार कर रहे हैं।

 

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