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    24 घंटे के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल बंद, मरीजों को सरकारी अस्पतालों में भेजा

    डॉक्टरों ने निकाला रोष मार्च, दिया ज्ञापन

    श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। राज्य सरकार द्वारा लाए गए राइट टू हेल्थ कानून के खिलाफ लामबंद हुए निजी चिकित्सकों ने आज प्रदेश व्यापी हड़ताल के तहत 24 घंटे के लिए प्राइवेट हॉस्पिटलों को बंद कर दिया। प्राइवेट हॉस्पिटल में आए मरीजों को स्टाफ सरकारी हस्पताल में जाने के लिए कहता रहा। इस बीच डॉक्टरों ने शहर में रोष मार्च निकाला।

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    सरकारी अस्पतालों में नियुक्त सेवारत डॉक्टरों ने इस हड़ताल के समर्थन में 2 घंटे के लिए पेन डाउन स्ट्राइक की। दोपहर को सुखाड़ियानगर मार्ग पर एक प्राइवेट हॉस्पिटल के सामने इकट्ठे हुए बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने राइट टू हेल्थ कानून को बिल्कुल व्यावहारिक बताते हुए रोस जुलूस निकाला। शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए डॉक्टर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। अतिरिक्त जिला कलेक्टर सतर्कता उम्मेदसिंह रत्नूं को राज्य सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने वालों में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सचिव डॉ. हरीश रहेजा, डॉ. हिमांशु आहूजा, डॉ. सरिता उपनेजा, डॉ. रूप सिडाना गसहित बड़ी संख्या में डॉक्टर उपस्थित रहे।

    मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए डॉ. रहेजा ने बताया कि सरकार यह कानून एक पक्षीय लेकर आई है। इस कानून को बनाते समय किसी तरह की कोई कमेटी नहीं बनाई। अगर कमेटी में डॉक्टरों के प्रतिनिधियों को भी शामिल कर उनके सुझाव लिए जाते तो आज प्राइवेट हॉस्पिटल बंद करने की नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि अगर यह कानून लागू हो गया तो प्राइवेट हॉस्पिटलों को चलाए रखना मुश्किल हो जाएगा।

    डॉ. रहेजा ने कहा कि वर्तमान में सरकारी अस्पतालों में कार्डियक और न्यूरो सर्जरी जैसे गंभीर रोगों से ग्रसित लोग जब जाते हैं तो उनका तत्काल इलाज शुरू नहीं किया जाता, बल्कि दो-तीन घंटे इधर-उधर घूमाते रहते हैं।ऐसे मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटलों में तत्काल उपचार मिलता है लेकिन अगर यह नया कानून लागू हो गया तो इस तरह के मरीजों का प्राइवेट हॉस्पिटलों में भी इलाज मुश्किल हो जाएगा। राज्य सरकार ने इस कानून को थोप कर डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने को मजबूर किया है। हम हड़ताल पर नहीं जाना चाहते थे। सचिव ने बताया कि आज सुबह से श्रीगंगानगर शहर ही नहीं पूरे जिले में प्राइवेट हॉस्पिटल बिल्कुल बंद है।

    ओपीडी में मरीज चेक नहीं किया जा रहे और अगर कोई एडमिट होने के लिए मरीज आता है तो उसे सरकारी अस्पताल में जाने का कह दिया जाता है। यह हड़ताल कल सुबह तक जारी रहेगी। इस बीच जयपुर में आईएमए के प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्य सरकार के प्रतिनिधि वार्ता करने में लगे हैं। अगर वार्ता असफल रही तो आइए में आगामी रणनीति पर विचार करेगी। डा.रहेजा ने कहा कि ऐसी सूरत में आंदोलन लंबा चल सकता है। प्राइवेट हॉस्पिटलों की हड़ताल के कारण आज मरीजों और उनके सेवादारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सरकारी अस्पतालों में पहले की अपेक्षा मरीजों की ज्यादा संख्या देखने को मिली।

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