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Friday, February 6, 2026
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    पंजाब विधानसभा वैधानिक कामकाज निपटाने के बाद अनिश्चितकाल के लिये स्थगित

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    Chandigarh News: विधायकों के 5 करोड़ फंड पर नियमों का संकट, नीति तैयार नहीं

    सदन की बैठक शुरू होते ही दिवंगत आत्माओं को दी गई श्रद्धांजलि | Punjab Legislative Assembly

    चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। (Punjab Legislative Assembly) पंजाब विधानसभा तीन बिल पंजाब कारोबार का अधिकार बिल ,पंजाब जल संसाधन बिल और पंजाब वस्तुएं एवं सेवा कर पारित करने के बाद आज अनिश्चितकाल के लिये स्थगित कर दी गई। इस विशेष सत्र के दौरान सुबह सदन की बैठक शुरू होते ही उन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी गई, जिनका पिछले सत्र के बाद निधन हो गया। इनमें पूर्व मंत्री जसबीर सिंह, सुखदेव सिंह सहबाजपुरी, पूर्व विधायक कामरेड बूटा सिंह , दलजीत कौर ,स्वतंत्रता सेनानियों सहित अन्य शख्सियतें शामिल हैं। सदन ने उनकी याद में दो मिनट का मौन रख उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    उसके बाद सदन की कार्यवाही आधा घंटे के लिये स्थगित कर दी गई। जब बैठक शुरू हुई तो उसमें पक्ष विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच तीन बिल पंजाब कारोबार करने का अधिकार बिल 2020 तो सर्वसम्मति से पारित कर दिया लेकिन पंजाब जल संसाधन बिल और पंजाब वस्तुयें एवं सेवाकर (संशोधन)बिल पारित कर दिया गया। उसके बाद सदन में केरला सरकार की तरह पंजाब सरकार ने नागरिकता संशोधन एक्ट (सी.ए.ए.) के विरुद्ध प्रस्ताव पेश किया जिस पर बहस हुई और इस दौरान अकाली दल और सत्तारूढ़ कांग्रेस के सदस्यों के बीच बीच बीच में तीखी नोकझोंक हुई।

    विस अध्यक्ष राणा केपी सिंह ने अकाली दल के संशोधन प्रस्ताव को किया रद्द

    अकाली दल तथा भाजपा गठबंधन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया तथा मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी तथा लोक इंसाफ पार्टी ने सरकार की ओर से सीएए के विरूद्ध लाये गये प्रस्ताव के समर्थन किया। अकाली दल ने सरकार से मांग की कि यदि वो इस प्रस्ताव में मुसलमानों को भी शामिल करती है तो वो इसका समर्थन करने को तैयार हैं लेकिन विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह ने अकाली दल के संशोधन प्रस्ताव को रद्द कर दिया।

    ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार ने पहले ही सीएए के साथ-साथ राष्ट्रीय नागिरक रजिस्टर (एन.आर.सी.) और राष्ट्रीय आबादी रजिस्टर (एन.पी.आर.) के मुद्दे पर अपने फैसले का ऐलान किया था कि वो सदन की इच्छा के मुताबिक आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार ने इन्हें पहले ही असंवैधानिक और विभाजनकारी बताते हुए रद्द कर दिया । सदन में संवैधानिक (126वां संशोधन), बिल-2019 के अंतर्गत एस.सी. /एस.टी. कोटा को राज्य में अगले दस साल के लिए जारी रखने के प्रस्ताव को भी पारित कर दिया ।

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