UGC Rules: हनुमानगढ़। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से प्रस्तावित नए नियमों/विधेयक में परिवर्तन के विरोध में सर्व ब्राह्मण महासभा की ओर से गुरुवार को राष्ट्रपति के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर के शिक्षाविदों, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं जागरूक नागरिकों की गंभीर चिंता और असंतोष से प्रशासन को अवगत कराया गया। Hanumangarh News
महासभा के जिलाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद शर्मा ने बताया कि यूजीसी की ओर से प्रस्तावित नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत विभाजन को बढ़ावा देने वाले, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को प्रभावित करने वाले तथा संविधान में निहित समानता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहा कि देश में पहले से ही भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, एंटी-रैगिंग नियम तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम जैसे कठोर कानून प्रभावी हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए अलग से नए जातिगत नियम लागू करने की आवश्यकता पर गंभीर पुनर्विचार आवश्यक है।
जातिगत भेदभाव के दोषी पाए जाने पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए
महासभा ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि यदि कोई छात्र-छात्रा या व्यक्ति जातिगत भेदभाव का दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्यवाही होनी चाहिए, लेकिन झूठे या दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए। कानून के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, नए नियमों में किसी एक वर्ग को स्वत: पीड़ित मानने की व्यवस्था को प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध बताया गया। महासभा ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2012 से पूर्व लागू नियमों में झूठे आरोप सिद्ध होने पर दंड या जुर्माने का प्रावधान था, जबकि प्रस्तावित नियमों में इसका अभाव गंभीर चिंता का विषय है।
महासभा के अनुसार, ये नियम शिक्षा संस्थानों में भय, असुरक्षा एवं आपसी तनाव का वातावरण पैदा कर सकते हैं, जिससे शिक्षा का मूल उद्देश्य ज्ञान, समानता और समरसता प्रभावित होगा। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि प्रस्तावित यूजीसी नियमों/विधेयक को वर्तमान स्वरूप में लागू न किया जाए। शिक्षाविदों, छात्र-छात्राओं, सामाजिक संगठनों एवं विधि विशेषज्ञों से व्यापक संवाद किया जाए। किसी भी जांच या समिति में सभी वर्गांे के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। कानून में पारदर्शिता, निष्पक्षता और दुरुपयोग रोकने के लिए स्पष्ट प्रावधान जोड़े जाएं। इस मौके पर रतनलाल शास्त्री, मनोज शर्मा, सुशील कुमार, विकास शर्मा, मनोहरलाल, शंकरलाल शर्मा, विश्वामित्र शर्मा, साहबराम, मूलचन्द शर्मा, महेन्द्र शर्मा, देवकीनन्दन, सतीश मौजूद रहे। Hanumangarh News















