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    मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती बनाकर किया जा रहा है विक्रय

    अलवर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान ग्रामीण आजीविका परिषद (राजीविका) द्वारा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मंदिरों में भगवान के आगे चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती बनाकर बाजारों में विक्रय किया जा रहा है। राजीविका के द्वारा महिलाएं अब इस प्रकार अपना स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर हो रही हैं। फूलों से बनी अगरवत्ती बाजार में काफी पसंद की जा रही है। इस काम के लिए अलवर में 30 महिलाएं काम कर रही हैं जो मंदिरों से वेस्टीज फूल जो भगवान के चढ़ावे के बाद उनको फेंका जाता है उनको इकट्ठा कर रही है और उनकी अगरबत्ती बना रही हैं। इन महिलाओं द्वारा सभी मंदिरों से संपर्क किया गया कि भगवान के चढ़ावे के बाद जो फूल बाहर फेंके जाते हैं उनको एकत्रित कर दिया जाए ऐसे में अब मंदिर के पुजारी भी पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन फूलों को बाहर खुले में नहीं पटकता और उनको इकट्ठा कर कर महिलाओं को दे देते हैं। जो यह फूल अब रोजगार के रूप में काम आ रहे हैं।

    राजीविका के मैनेजर प्रशांत कुमार ने बताया कि अलवर जिले के 16 ब्लॉकों में 9000 सहायता समूह के माध्यम से 95000 महिलाएं जुड़ी हुई हैं जो विभिन्न उत्पाद बनाती हैं जैसे अचार पापड़, मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा सहित अन्य उत्पाद बनाती हैं लेकिन सक्षम अलवर मिशन के तहत अब महिलाएं वेस्टेज फूलों से अगरबत्ती बनाने का काम शुरू किया है। उन्होंने बताया कि आरसीटी द्वारा 30 महिलाओं को अगरबत्ती बनाने की ट्रेनिंग दी गई कि फूलों से अगरबत्ती किस तरह तैयार होती है। उसके बाद मंदिरों से संपर्क कर वेस्टेज फूलों को लाती हैं इसके बाद जोश पाउडर एवं चार फूल पाउडर का मिश्रण तैयार कर स्टिक पर रोल आउट करती हैं और उसके बाद अगरबत्ती तैयार हो जाती है।

    क्या है मामला:

    राजीविका उसकी ब्रांडिंग ,पैकेजिंग और बाजार में सप्लाई का जिम्मा लेता है और सप्लाई बीए महिलाएं ही करती हैं क्योंकि स्थानीय स्तर पर जो दुकानदार होते हैं उन तक यह महिलाएं आसानी से अगरबत्तियां बेच देती हैं। अलवर में दिवाली पर अभी 15 दिन में 10000 पैकेट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह महिलाएं दो-तीन घंटे काम कर प्रतिदिन 400 रूपए के करीब कमा लेती हैं। उन्होंने बताया कि महिलाएं मंदिर से फूलों को लाती हैं फिर उनको सुखाती हैं और उनका पाउडर बनाती हैं। पाउडर के बाद मिश्रण तैयार कर उसको रोल करती हैं और धूप में उसको सुखा देती हैं जो अल्प समय में अगरबत्ती तैयार हो जाती है फिर उसकी पैकेजिंग करती हैं पैकेजिंग के बाद बाजार में सप्लाई के लिए बिकने के लिए चला जाता है।

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