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    एसएमएस में हुआ राजस्थान का पहला रेट्रोऑरिक्यूलर एंडोस्कोपिक थाइरोइड ऑपरेशन सफल

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    Jaipur News: रेट्रोऑरिक्यूलर एंडोस्कोपिक थाइरोइड ऑपरेशन करने वाली टीम, मरीज के गले में बनी गांठ

    जयपुर (सच कहूँ न्यूज़)। Jaipur News: सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के ईएनटी विभाग में गुरुवार को थाइरोइड ऑपरेशन एक नई तकनीक रेट्रोऑरिक्यूलर एंडोस्कोपिक सर्जरी से किया गया। यह संभवतः राजस्थान का पहला सफल ऑपरेशन है जो इस उन्नत विधि से किया गया।

    ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि भरतपुर जिले के भुसावर निवासी काजल (20 वर्ष) की गर्दन में बिना चीरा लगाए कान के पीछे से दूरबीन तकनीक द्वारा थायराइड ग्रंथि की गांठों को निकाला गया।

    उन्होंने बताया कि इस विधि में गर्दन पर कोई कट नहीं लगता। कान के पीछे बालों से छिपे हिस्से में एक छोटे छिद्र के माध्यम से एंडोस्कोपिक उपकरण डाले जाते हैं। इसके जरिए सर्जन थायराइड ग्रंथि तक सीधा पहुँचकर गांठों को निकाल सकते हैं। Jaipur News

    डॉ. सिंघल के अनुसार, यह तकनीक पारंपरिक तरीकों से बेहतर है क्योंकि इसमें संक्रमण या जटिलताओं (complications) की संभावना नगण्य होती है। ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। उसे न दर्द है, न ही आवाज पर कोई असर पड़ा है।

    उन्होने बताया कि रेट्रोऑरिक्यूलर एंडोस्कोपिक तकनीक पारंपरिक ओपन थाइरोइड सर्जरी की तुलना में अधिक सुरक्षित, सौंदर्यपूर्ण और रोगी के अनुकूल है।

    इस सर्जरी को डॉ.परिधि सिसोदिया, डॉ.इशिता बंसल और डॉ.तान्या (ईएनटी विभाग) ने डॉ.सिंघल के साथ मिलकर ऑपरेशन में सहयोग दिया। निश्चेतन विभाग की टीम में डॉ.सुनीता मीना और डॉ. महिपाल, जबकि नर्सिंग टीम में नेहा, दिलीप और तारा सिंह शामिल थे।

    क्या है रेट्रोऑरिक्यूलर एंडोस्कोपिक सर्जरी | Jaipur News

    रेट्रोऑरिक्यूलर एंडोस्कोपिक सर्जरी (Retroauricular Endoscopic Surgery) एक आधुनिक और कम इनवेसिव (Minimally Invasive) सर्जिकल तकनीक है, जिसमें ऑपरेशन कान के पीछे से किया जाता है — यानी चेहरे या गर्दन पर कोई चीरा या निशान नहीं पड़ता।

    यह तकनीक विशेष रूप से थायराइड, पैराथायराइड और सैलिवरी ग्लैंड जैसी सर्जरी में उपयोग होती है।

    इस तकनीक के लाभ:

    कोई दिखाई देने वाला निशान नहीं — गर्दन पर दाग या चीरा नहीं रहता।

    कम दर्द और तेज रिकवरी — मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट आता है।

    कम रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा — सर्जरी क्षेत्र छोटा होने से जोखिम घटता है।

    सर्जन को बेहतर दृश्य नियंत्रण — एंडोस्कोपिक व्यू से अधिक स्पष्टता मिलती है।

    सौंदर्य की दृष्टि से बेहतर विकल्प — खासकर युवा मरीजों और महिलाओं के लिए उपयुक्त।

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