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    …और 31 सालों के बाद अपने परिवार से मिला रामू

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    रामू को 31 साल पहले उसका साथी छोड़ गया था पटियाला में

    पटियाला(सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर)। उत्तर-प्रदेश निवासी रामू 31 सालों से अपने परिवार से दूर था और अपने परिवार से मिलने की उम्मीद भी खोए बैठा था। उसे इस तरह लग रहा था कि जैसे वह तीन दशकों से अकेला था और अब रहती जिंदगी भी अकेला ही काटेगा परन्तु डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु जो पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्ररेणाओं पर चलते हुए बिछड़ों को मिलाने के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने ही रामू को उसके परिवार से 31 सालों बाद मिलाया है। एकत्रित जानकारी के मुताबिक 31 साल पहले उत्तर प्रदेश का रहने वाला रामू नामक 12 वर्षीय लड़का पंजाब आया और लौट कर घर वापिस नहीं जा सका।

    रामू किसी साथी के साथ काम की तलाश में पंजाब आया था और उसका साथी उसे छोड़ कर चला गया। उसी समय ही रामू पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा और वह पटियाला में रह गया और इधर-उधर काम की तलाश करने लगा।  गांवों में काम मिलने के बाद वह काफी समय तक विभिन्न गांवों में काम करता रहा और अपने घर का पता न होने के कारण रामू की घर जाने इच्छा खत्म हो गई। रामू के लिए बड़ी बात यह रही कि गांवों में काम करने के दौरान उसका पटियाला ब्लॉक के जिम्मेवारों से संपर्क हुआ। काफी समय वह पटियाला कैंटीन में काम करता रहा। इस दौरान डेरा सच्चा सौदा के ब्लॉक पटियाला के जिम्मेवारों ने उसकी सारी दास्तां सुनी। इस दौरान ब्लॉक पटियाला के जिम्मेवारों ने उसके परिवार के खोज के लिए मुहिम शुरू कर दी।

    उसके गांव का पता ढूँढा। रामू यूपी के फैजाबाद से 45 किलोमीटर दूर गांव बेहती का रहने वाला था। रामू को उसके घर पहुंचाने के लिए पंद्रह मैंबर सबरजीत हैपी और सोहन लाल ने पटियाला से टेÑन पकड़ी और उसके घर तक पहुंच गए। जब परिवार ने 31 साल पहले अपने बिछुड़े हुए रामू को देखा तो उनकी आंखों से अश्रु धारा बह चली। इतने समय में चाहे रामू के माता-पिता चल बसे थे परंतु उसके परिवार में भाई -भाभी और गांव के लोगों ने उसे पहचान लिया। परिवार ने कहा कि वह तो अब रामू की उम्मीद ही खो चुके थे, परन्तु डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं ने उनके रामू को तीन दशकों बाद घर पहुंचाकर उनके अरमानें को फिर से जगा दिया है।

    परिवार से मिलने के बाद रामू की उदास आंखों में दिखी खुशी

    45 मैंबर हरमिन्दर नोना और ब्लॉक के जिम्मेवार 15 मैंबर मलकीत सिंह इन्सां ने बताया कि चुपचाप रहने वाला रामू अपने परिवार के साथ मिलते समय खुशी उसकी आंखें साफ बयान कर रही थीं। रामू के मिलने से परिवार के अलावा गाँववासियों ने भी खुशी मनाई। उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां और साध-संगत का लाखों बार धन्यवाद करते हुए उनको इन्सानियत के मसीहे बताया।

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