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Sunday, March 1, 2026
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    India’s GDP: रेपो रेट को लेकर आरबीआई कर सकता है बड़ा ऐलान!

    India’s GDP: नई दिल्ली। यदि आने वाले जीडीपी आंकड़े अपेक्षाओं से कम रहते हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व कमजोर श्रम बाजार को देखते हुए आक्रामक रूप से ब्याज दरों में कटौती करता है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) भी नीतिगत दरों में कमी पर विचार कर सकती है। यह जानकारी एचएसबीसी म्यूचुअल फंड की एक ताज़ा रिपोर्ट में दी गई है। GDP News

    रिपोर्ट के अनुसार, यदि विकास दर धीमी पड़ती है और अमेरिकी फेड श्रम बाजार की कमजोरी से निपटने के लिए दरों में कमी करता है, तो आरबीआई के पास भी नीतिगत ढील की गुंजाइश बढ़ सकती है। हाल ही में हुई अपनी बैठक में एमपीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान 6.5 प्रतिशत पर कायम रखा है। तिमाही आधार पर यह अनुमान पहली तिमाही में 6.5 प्रतिशत, दूसरी में 6.7 प्रतिशत, तीसरी में 6.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.3 प्रतिशत रहने का है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल सीमित दायरे में रह सकता है, जिसमें तरलता की स्थिति प्रमुख कारक होगी। आरबीआई ने फिलहाल रेपो दर को 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखा है और कुल 100 आधार अंकों की कटौती के बाद तटस्थ रुख बनाए रखा है। GDP News

    एचएसबीसी म्यूचुअल फंड का मानना है कि आरबीआई ने हालिया दर कटौती के प्रभाव को सामने आने के लिए समय देने का निर्णय लिया है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं और शुल्क-संबंधी जोखिमों से विकास दर प्रभावित हो सकती है, लेकिन मुद्रास्फीति पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि आरबीआई प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखने का प्रयास करेगा, ताकि पहले की दर कटौतियों का लाभ पूरी तरह जनता और उद्योग तक पहुंच सके। आगामी माह नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में संभावित कटौती से भी उधारी की लागत कम होने की उम्मीद है। वर्तमान में 2 से 4 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड, भारतीय सरकारी बॉन्ड की तुलना में 65-75 आधार अंकों का बेहतर प्रतिफल दे रहे हैं। आगे चलकर इस अंतर में कमी आ सकती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यदि सितंबर से अमेरिकी फेडरल रिजर्व दरों में कटौती शुरू करता है और मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक स्थिर रहती है, तो आरबीआई के पास भी कार्रवाई के अधिक अवसर होंगे। अनुमान है कि एमपीसी वर्ष 2025 के अंत तक एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगा, जिसमें भारत की आर्थिक वृद्धि प्राथमिक फोकस रहेगी। GDP News

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