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    आरबीआई ने फिर बढ़ाई ब्याज दरें, गवर्नर शक्तिकांत दास ने कही ये 10 बड़ी बातें

    आरबीआई ने फिर बढ़ाई ब्याज दरें, जानें मुख्य बातें

    मुंबई (एजेंसी)। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की द्विमासिक बैठक में लिए गये निणर्यों की घोषणा की, जिसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं

    • मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर में लगातार चौथी बार की बढोतरी।
    • रेपो दर 0.5 प्रतिशत बढ़कर 5.9 प्रतिशत पर।
    • मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर भी 6.15 प्रतिशत पर।
    • स्टैंडिंग डिपोजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर आधी फीसद बढ़ाकर 5.65 प्रतिशत पर।
    • वित्त वर्ष 2022-23 में आर्थिक विकास दर अनुमान 7.2 प्रतिशत से घटाकर 7.0 प्रतिशत पर।
    • वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में विकास दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान।
    • चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई अनुमान 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसके 5.0 प्रतिशत पर आने का अनुमान।
    • मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 05 से 07 दिसंबर को होगी।

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    अगस्त में मुद्रास्फीति बढ़कर 7.0 प्रतिशत

    दास ने कहा कि समिति के छह में से पांच सदस्यों ने नीतिगत दरों में 0.50 प्रतिशत की बढोतरी करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही समिति ने समायोजन वाले रूख को वापस लेने पर भी सहमति जतायी है। इससे महंगाई को लक्षित दायरे में लाने और विकास को गति देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम का घरेलू मुद्रास्फीति पर प्रभाव पड़ा है। इस वर्ष अगस्त में मुद्रास्फीति बढ़कर 7.0 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 6.7 प्रतिशत थी। चालू वित्त वर्ष की शुरूआत में महसूस किया गया कि मुद्रास्फीति दबाव कम हो गया लेकिन खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई है। प्रमुख उत्पादक देशों से बेहतर आपूर्ति होने और सरकार की ओर से किए गए उपायों के बावजूद महंगाई का दबाव बने रहने की संभावना है। आगे चलकर आपूर्ति की शर्तों को आसान बनाने और धातु एवं कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण मूल्य वृद्धि में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि खाद्य पदार्थों की कीमतों को लेकर जोखिम अभी भी कायम है। खरीफ फसलों का उत्पादन कम होने की संभावना से गेहूं से चावल की कीमतों में तेजी रह सकती है।

    इसके साथ ही भारतीय बास्केट कच्चे तेल की कीमत चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल थी। दूसरी छमाही में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है। इन कारकों को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2022-23 में मुद्रास्फीति अनुमान 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में महंगाई दर 7.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में महंगाई दर के कम होकर पांच प्रतिशत पर आने की उम्मीद है।

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