हमसे जुड़े

Follow us

26.3 C
Chandigarh
Thursday, March 5, 2026
More
    Home कारोबार RBI Loan: आरब...

    RBI Loan: आरबीआई ने बैंकों को लोन की राशि बढ़ाने को किया ये बड़ा ऐलान

    मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया है, जिसमें बैंकों को देशी या विदेशी कंपनियों में हिस्सेदारी (स्टेक) अधिग्रहण के लिए भारतीय कंपनियों को अधिक ऋण (Loan) प्रदान करने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया गया है। यह नए दिशा-निर्देश 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी किए जाने की संभावना है। RBI Loan News

    नए प्रावधानों के तहत, यह ऋण किसी अल्पकालिक वित्तीय पुनर्गठन (Short-term Restructuring) के बजाय दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश (Long-term Strategic Investment) के रूप में माना जाएगा, जिससे कंपनियों के विकास और स्थायी मूल्य सृजन (Value Creation) को बढ़ावा मिलेगा।

    आरबीआई के प्रस्ताव के अनुसार, अधिग्रहण करने वाली कंपनी को कुछ निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होगा। इनमें यह आवश्यक है कि कंपनी लिस्टेड (सूचीबद्ध) हो और उसकी नेट वर्थ (शुद्ध संपत्ति) मजबूत हो। साथ ही, पिछले तीन वित्तीय वर्षों का लाभ रिकॉर्ड (Profit Record) भी सकारात्मक होना चाहिए। ड्राफ्ट सर्कुलर में कहा गया है कि बैंक किसी अधिग्रहण सौदे के अधिकतम 70 प्रतिशत तक की राशि का वित्तपोषण कर सकते हैं, जबकि शेष 30 प्रतिशत निवेश अधिग्रहण करने वाली कंपनी को अपने स्वयं के फंड से इक्विटी के रूप में करना होगा। RBI Loan News

    इसके अतिरिक्त, किसी एक बैंक का कुल एक्विजिशन फाइनेंस उसके टियर-I पूंजी (Tier-I Capital) के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगा। बैंक चाहें तो ऋण सीधे अधिग्रहण करने वाली कंपनी को दें या फिर उस स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) को, जिसे विशेष रूप से इस सौदे के लिए बनाया गया हो। आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि लोन देने वाले बैंकों को एक्विजिशन फाइनेंस पर एक समर्पित नीति तैयार करनी होगी। इस नीति में उधारकर्ताओं की पात्रता, जोखिम प्रबंधन, सुरक्षा, मार्जिन, निगरानी तंत्र और सीमाओं का विस्तृत विवरण शामिल होना आवश्यक है।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिग्रहण करने वाली कंपनी या उसका एसपीवी किसी भी स्थिति में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) या अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) नहीं होना चाहिए। साथ ही, अधिग्रहणकर्ता और लक्ष्य कंपनी रिलेटेड पार्टी (संबद्ध पक्ष) नहीं होनी चाहिए। आरबीआई के अनुसार, लक्ष्य कंपनी का अधिग्रहण मूल्य सेबी (SEBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए। ऋण स्वीकृति से पहले बैंकों को अधिग्रहणकर्ता और लक्ष्य कंपनी की संयुक्त बैलेंस शीट (Combined Balance Sheet) का गहन मूल्यांकन भी करना होगा। RBI Loan News