हमसे जुड़े

Follow us

22.5 C
Chandigarh
Saturday, February 14, 2026
More
    Home विचार सम्पादकीय धार्मिक नहीं,...

    धार्मिक नहीं, कानूनी मुद्दा है राम मंदिर का निर्माण

    Religious, Legal, Issue, Construction, Ram Temple

    1980 के दशक में भाजपा ने श्री राम मंदिर के निर्माण को मुख्य मुद्दा बनाकर राजनीति में अपनी जगह बनाई थी। हालांकि यह मुद्दा केवल कानूनी था, लेकिन भाजपा ने इसे राजनैतिक रंगत देकर राजनीति में उठापठक मचाई हुई है। भाजपा के सहयोगी संगठनों की कार्यवाही के दौरान 1992 में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया। अब एक बार फिर लोक सभा चुनाव नजदीक हैं। भाजपा की मंदिर निर्माण को लेकर राजनैतिक हलचल तेज हो गई है, लेकिन अब हालात काफी बदल चुके हैं।

    लोग मंदिर चाहते हैं लेकिन इसके नाम पर राजनीति के खिलाफ हैं। दरअसल श्री राम जी भारत की सनातन आत्मा के प्रतीक हैं और उनके जन्म स्थान पर मंदिर के निर्माण का कहीं भी विरोध नहीं है। भूमि वितरण का मामला कानूनी था जिसका निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सन 2010 में कर दिया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज बब्बर ने भी कहा है, श्री राम जी का मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो ओर कहाँ बनेगा? अयोध्या की मुस्लिम जनसंख्या भी मंदिर निर्माण के खिलाफ नहीं।

    चार दशकों के करीब मस्जिद के मामले की पैरवी करने वाले हाशिम अंसारी ने देहांत से पूर्व मीडिया में इस बात का जिक्र किया था कि राम लल्ला अयोध्या के ही हैं। दरअसल धार्मिक स्थान तो समाज का एक अंग है और देश में पूजा-अर्चना की सैंकड़ों विधियां हैं। औरंगजेब के बाद शासन द्वारा बलपूर्वक किसी की पूजा विधि में दखल देना काफी हद तक घटा है। संविधान में धर्म के आधार पर भेदभाव के प्रयास को गैर-कानूनी करार दिया गया है। केवल कानूनी तौर पर ही नहीं बल्कि भारतीय समाज ने भी धार्मिक सहनशीलता को संस्कृति की सर्वोत्तम विशेषता के तौर पर अपनाया है। मंदिर श्रद्धा का केंद्र व धार्मिक मुद्दा है।

    विश्व के दर्जनों मुस्लिम देश, खासकर जहां इस्लाम का उदय हुआ, ने भी इस मुद्दे पर किसी तरह की दखलअंदाजी नहीं की। यह तो राजनैतिक लोगों की धूर्तता है, जो जनता को केवल एक वोटर के रूप में देखते हैं और धर्म के नाम पर बांटते हैं। श्री राम मंदिर धार्मिक वर्ग की जरूरत है, यह किसी की जीत या हार नहीं। इस वक्त न तो यह वोट का मामला है और न ही इसे वोट बैंक से जोड़कर किसी लक्ष्य की पूर्ति की जानी चाहिए। विश्व स्तर पर भारत की अपनी एक अलग पहचान है, जिसका आधार सांप्रदायिक नहीं है। मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अधीन है। अदालती प्रक्रिया से आगे जाकर जज्बाती टिप्पणियां से बचा जाना करना चाहिए। देश की सरकार में बैठे वरिष्ठ नेता व विपक्ष के नेता समझदारी व संयम रखें। यहां सामाजिक/ धार्मिक संगठनों को भी देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना व निभाना चाहिए। कानून का सम्मान करने में ही देश की भलाई है।

    Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

    Religious, Legal, Issue, Construction, Ram Temple