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    Deaflympics: रूड़की के अभिनव देशवाल ने देश का नाम किया रोशन, पिता मनोज देशवाल ने सच कहूँ को दिया इंटरव्यू

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    Deaflympics: रूड़की के अभिनव देशवाल ने देश का नाम किया रोशन, पिता मनोज देशवाल ने सच कहूँ को दिया इंटरव्यू

    Deaflympics: रूड़की (दीपक त्यागी)। बधिर ओलिंपिक्स में भारतीय निशानेबाजों ने फिर से भारत का नाम रोशन किया है। विशेष रूप से अभिनव देशवाल और प्रांजलि प्रशांत धूमल की जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल माइक्रेड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर मात-पिता के लिए एक बेहद गर्व का पल पेश किया है।

    अभिनव देशवाल की कहानी, पिता मनोज देशवाल की प्रेरणा | Deaflympics

    अभिनव देशवाल का शुरूआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। चार महीने की उम्र में उन्हें मेनिन्जाइटिस हुआ और उनकी सुनने की क्षमता बहुत कम बची रह गई। बाद में कोक्लियर इम्प्लांट लगाने के बाद कुछ हद तक सुनने की क्षमता वापस आई, लेकिन भाषा और संचार में मुश्किलें बनी रहीं।

    उनके पिता मनोज देशवाल ने अभिनव को न केवल उनकी चुनौतियों के बावजूद मोटिवेट किया, बल्कि उन्होंने अपनी सारी प्राथमिकताओं को बदल दिया। मनोज पहले अपना कोचिंग सेंटर चलाते थे, लेकिन अब पूरी तरह से अभिनव के सफर का समर्थन कर रहे हैं।

    मनोज कहते हैं कि शुरूआत में उन्होंने सोचा था, ‘अगर बेटे की पढ़ाई अच्छी नहीं होगी, तो हमें दूसरा रास्ता देखना होगा’— और वही दूसरा रास्ता निशानेबाजी बनी। उनकी कठिन मेहनत और पिता की बलिदानी मेहनत ने अभिनव को मंच तक पहुँचाया, जहां उन्होंने बड़ी प्रतियोगिताओं में अपना कौशल दिखाया है। उन्होंने बताया कि अभिनव देशवाल को यहां तक पहुंचाने के लिए उनके कोच अमित धीमान का बहुत योगदान है उनकी कड़ी मेहनत से मेरा बेटा ने ये मुकाम हासिल किया है।

    उनकी उम्मीदें, संघर्ष, और विश्वास

    अभिनव और प्रांजलि की जीत सिर्फ एक स्पोर्ट्स कहानी नहीं है, बल्कि यह परिवार की कहानी भी है — उनकी उम्मीदें, संघर्ष, और विश्वास। उनकी सफलता हमें यह सिखाती है कि माता-पिता का समर्थन बच्चे की उड़ान में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है। यह उपलब्धि उन सभी माता-पिताओं के लिए एक उत्साहवर्धक संदेश है जो अपने बच्चों की क्षमताओं पर भरोसा रखते हैं और उन्हें आगे बढ़ने का साहस देते हैं।

    इस तरह जीता अभिनव देशवाल और प्रांजली प्रशांत धुमाल ने गोल्ड

    टोक्यो में जारी 25वें समर डेफलम्पिक्स में भारतीय निशानेबाज़ों का शानदार प्रदर्शन जारी रहा, जहां अभिनव देशवाल और प्रांजली प्रशांत धुमाल ने 10मी एयर पिस्टल मिश्रित टीम इवेंट में चीनी ताइपे के या-जू काओ और मिंग-जुई हसु को 16-6 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दिन की दूसरी स्पर्धा में कुशाग्र सिंह राजावत ने 50मी राइफल प्रोन में कांस्य पदक जीता। इन पदकों के साथ भारत की शूटिंग में कुल पदक संख्या 11 हो गई है, जो अभी तक टोक्यो में भारत के जीते गए कुल पदक हैं।
    अभिनव और प्रांजली ने स्वर्ण पदक मैच की शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा और प्रतिद्वंद्वियों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इससे पहले क्वालिफिकेशन में दोनों ने डेफ वर्ल्ड और ओलंपिक रिकॉर्ड की बराबरी की थी, जिसे पिछले डेफलम्पिक्स में इसी जोड़ी ने स्थापित किया था। भारतीय जोड़ी ने 569-20x का संयुक्त स्कोर किया, जिसमें अभिनव ने 287-12x (97, 95, 95) और प्रांजली ने 282-8x (95, 94, 93) स्कोर किया। दोनों निशानेबाज सोमवार को व्यक्तिगत वर्ग में भी रजत पदक जीत चुके हैं।
    भारत की दूसरी जोड़ी, महिलाओं की व्यक्तिगत चैंपियन अनुया प्रसाद और रुदार विनोद कुमार क्वालिफिकेशन में 553-10x के संयुक्त स्कोर के साथ सातवें स्थान पर रही। अनुया ने 280-5x (93, 91, 96) जबकि रुदार ने 273-5x (92, 90, 91) स्कोर किया। ईरान के महला सामीई और बिजान गफ़ारी ने यूक्रेन के सोफिया ओलेनिच और ओलेक्ज़ेंडर कोलोडी को हराकर कांस्य पदक जीता। 50मी राइफल प्रोन में कुशाग्र सिंह राजावत ने 224.3 के स्कोर के साथ कांस्य पदक पर कब्ज़ा जमाया। यूक्रेन के दिमित्रो पेट्रेंको ने 251.0 के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता और डेफ वर्ल्ड व ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ा, जबकि जर्मनी के कॉलिन म्यूएलर ने 245.4 के साथ रजत पदक जीता। महित संधू और नताशा जोशी कल महिलाओं की 50मी थ्री पोज़िशन्स इवेंट में हिस्सा लेंगी। महित पहले ही 10मी एयर राइफल मिश्रित टीम और व्यक्तिगत वर्ग में क्रमशः स्वर्ण और रजत जीत चुकी हैं।

    उपलब्धियां-

    (1) डेफलिंपिक – गोल्ड मेडल – 2022 (ब्राजील)
    (2) 1 गोल्ड और 4 सिल्वर मेडल – डेफ वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप 2024 – जर्मनी
    (3) अब 10m एयर पिस्टल में 1 सिल्वर मेडल और 1 गोल्ड मेडल 10m एयर पिस्टल मिक्स टीम
    -जापान टोक्यो 2025
    (4) नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में लगभग 35 मेडल (2018 से 2025 तक)
    नोट- नॉर्मल कैटेगरी में 5 मेडल (नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप)