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    INR News: रुपये में भारी गिरावट, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा

    INR Today: नई दिल्ली। मंगलवार की शुरुआती कारोबारी सत्र में रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट का सामना करता हुआ 32 पैसे लुढ़ककर 89.85 प्रति डॉलर के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका–भारत व्यापार समझौते में प्रगति न होने की आशंकाओं ने मजबूत आर्थिक वृद्धि के सकारात्मक प्रभाव को भी कम कर दिया। INR News

    सोमवार को रुपया 89.73 के स्तर पर बंद हुआ था, जो लगभग दो सप्ताह पहले दर्ज किए गए 89.49 के रिकॉर्ड निम्न स्तर से भी खराब स्थिति दर्शाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 3 नवंबर से अब तक रुपये में डॉलर के मुकाबले एक रुपये से अधिक की कमजोरी आई है। वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक रुपया लगभग 4–5% तक गिर चुका है, जिससे यह एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी में शामिल हो गया है।

    गिरावट का समय भी महत्वपूर्ण है

    इस गिरावट का समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक से ठीक पहले सामने आई है, जबकि इसके विपरीत दूसरी तिमाही में 8.2% की मजबूत GDP वृद्धि का आंकड़ा घोषित किया जा चुका है। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक 3 से 5 दिसंबर 2025 के बीच आयोजित होने वाली है। INR News

    सूत्रों के अनुसार, यह माना जा रहा है कि भारतीय केंद्रीय बैंक रुपये को 90 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे जाने से रोकने हेतु बाजार में डॉलर बेच रहा है। करेंसी में उतार-चढ़ाव की वजह कॉर्पोरेट डॉलर मांग में बढ़ोतरी, निर्यातकों से सप्लाई में अस्थिरता और सट्टा कारोबार की स्थिति को बताया जा रहा है।

    विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर भारत आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों में सबसे मजबूत स्थिति में है, किन्तु मुद्रा बाजार इसका उल्टा परिदृश्य दिखा रहा है-जहां लगातार दबाव और अनिश्चितता बनी हुई है। डॉलर की लगातार मांग और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता की अस्पष्टता किसी भी संभावित रिकवरी को बाधित कर रही है। INR News

    वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और क्रिप्टो बाजार में अचानक गिरावट

    मेहता इक्विटीज के कमोडिटी विशेषज्ञ राहुल कलंत्री ने कहा कि निर्यात में धीमी वृद्धि, व्यापार समझौतों-विशेषकर अमेरिका के साथ- को लेकर अनिश्चय और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से डॉलर की मांग तेज हुई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और क्रिप्टो बाजार में अचानक आई गिरावट ने भी डॉलर को सुरक्षित निवेश का विकल्प बना दिया है, जिससे रुपये पर और दबाव पड़ा है।

    जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार, रुपये में निरंतर कमजोरी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के प्रवाह पर नकारात्मक असर डाल रही है। उनका कहना है कि अमेरिका के साथ एक स्पष्ट व्यापार समझौता रुपये की स्थिरता में मददगार हो सकता है, लेकिन वार्ता लंबे समय से लंबित है।

    1 दिसंबर 2025 को विदेशी संस्थागत निवेशक घरेलू शेयर बाजार में शुद्ध विक्रेता के रूप में सामने आए। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, एफआईआई ने ₹1,139.85 करोड़ मूल्य की बिक्री की, जबकि 30 नवंबर तक कुल ₹15,659.31 करोड़ मूल्य की इक्विटी बिक चुकी थी। INR News