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    मेयर प्रत्याशी घोषित करने में समाजवादी पार्टी ने बाजी मारी

    Samajwadi-Party
    • हॉट सिटी में शुमार शहर गाजियाबाद में नीलम गर्ग को सौंपी साइकिल दौड़ाने की जिम्मेदारी
    • सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने की घोषणा
    • भाजपा, कांग्रेस व बसपा में चल रहा अभी मंथन जारी

    गाजियाबाद (सच कहूँ / रविंद्र सिंह)। समाजवादी पार्टी ने मेयर सीट पर (Samajwadi Party) रणनीति के तहत सामान्य वर्ग के वैश्य समाज की नीलम गर्ग को महापौर प्रत्याशी बनाकर चुनाव के मैदान में उतारा है। इसकी घोषणा सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने शनिवार दोपहर ही कर दी है। वहीं, इस सीट पर अभी भाजपा, कांग्रेस, बसपा में दावेदारों के बीच अभी टिकट को लेकर लड़ाई चल रही है।और किसी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं हो सकी है। जातीय समीकरण के तहत परंपरागत वोटरों के साथ ही वैश्य समाज के वोटरों को साधने के लिए सपा ने नीलम को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में अब अब दूसरे दलों के लिए चुनौती बढ़ गई है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि दूसरे दल अपना प्रत्याशी किसे बनाएंगे?

    गाजियाबाद स्थित पटेल नगर निवासी नीलम गर्ग (Samajwadi Party) समाजसेवी और शिक्षाविद हैं। दुहाई स्थित एक कालेज में वह डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पति पीएन गर्ग विधानसभा चुनाव 2022 से छह माह पूर्व कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुए थे। कयास लगाए जा रहे थे कि उनको विधानसभा चुनाव में सपा गाजियाबाद शहर सीट से प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतार सकती है, उन्होंने टिकट की दावेदारी भी की थी लेकिन सपा ने गाजियाबाद शहर सीट पर विशाल वर्मा को प्रत्याशी बनाया था।

    इस बार भी पहले गाजियाबाद महापौर की सीट के अनारक्षित (Samajwadi Party) होने की घोषणा पर पीएन गर्ग खुद महापौर प्रत्याशी बनकर चुनाव के मैदान में उतरना चाहते थे, इसके लिए भी उन्होंने दावेदारी की लेकिन बाद में महापौर सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई तो उन्होंने अपनी पत्नी को चुनाव के मैदान में उतारने के लिए टिकट की दावेदारी की, जिसमें उनको सफलता हासिल हुई।

    नगर निगम क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 15.39 लाख | Samajwadi Party

    गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 15.39 लाख है। इनमें शहरी क्षेत्र में वैश्य मतदाता मजबूत स्थिति में हैं। शहर में 2.10 लाख वैश्य, 1.75 लाख ब्राह्मण, 1.82 लाख एससी, 1.80 लाख मुस्लिम, 2.35 लाख ओबीसी, 1.45 लाख पंजाबी मतदाता बताए जाते हैं। रालोद और आजाद पार्टी का सपा से गठबंधन होेने के कारण पिछड़ों और ओबीसी वर्ग के मतदाताओं को लेकर सपा ने इस बार साइकिल को मंजिल तक पहुंचाने के लिए जातीय समीकरण बनाने की भरपूर कोशिश की है। ऐसे में भाजपा के लिए चुनौती बढ़ गई है, क्योंकि अब तक महापौर की सीट उनके कब्जे में ही रही है।

    सपा से पूर्व में यह रहे प्रत्याशी | Samajwadi Party

    सपा ने वर्ष 1995 में सुरेंद्र त्यागी को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वह चौथे स्थान पर रहे थे। 2000 में राजकुमार को प्रत्याशी बनाया गया लेकिन वह भी हार गए। वर्ष 2006 में सपा ने अंजुला नागपाल को प्रत्याशी बनाया गया लेकिन जीत हासिल नहीं हुई। वर्ष 2012 में सुधन रावत प्रत्याशी बने, लेकिन वह मंजिल से चंद कदम दूर रह गए। पांच हजार से भी कम वोटों से उनको हार का सामना करना पड़ा।

    इसके बाद उपचुनाव में भी सुधन रावत उतरे लेकिन हार गए। 2018 में व्यापारी नेता अभिषेक गर्ग की पत्नी राशि गर्ग को सपा ने चुनाव में उतारा था, लेकिन वह भी हार गईं। राशि को इस बार भी चुनाव के मैदान में उतारने के लिए प्रयास किया गया लेकिन अभिषेक गर्ग ने पत्नी को महापौर प्रत्याशी बनाने से इन्कार कर दिया था। ऐसे में सपा ने नीलम गर्ग को प्रत्याशी बनाकर चुनाव के मैदान में उतारा है।

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