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    संगरूर : गांव खुराना के युवा किसान ने वर्ष 2016 से नहीं जलाई पराली

    Commendable Effort

    सराहनीय प्रयास। अपने खेतों में पराली का सभ्य इस्तेमाल करने के साथ-साथ अन्य किसानों को भी कर रहा जागरूक | Commendable Effort

    संगरूर(सच कहूँ न्यूज)। जिला संगरूर के गांव खुराना का 27 वर्षीय प्रगतिशील किसान (Commendable Effort) गुरसेवक सिंह अन्य किसानों के लिए मिसाल बना है, जो पराली का सभ्य इस्तेमाल कर पर्यावरण संभाल में योगदान दे रहा है। किसान गुरसेवक सिंह पुत्र रघवीर सिंह निवासी खुराना ने बताया कि उसने ग्रेजुएशन करने के बाद पीजीडीसीए की हुई है और इस समय वह पामेती लुधियाना में बतौर डैमोनस्ट्रेटर नौकरी कर रहा है।

    वह पामेती की तरफ से यूऐनईपी (यूनाइटिड नेशन एन्वायरनमेंट प्रोगराम) की मदद से चलाए प्रॉजैक्ट के अंतर्गत मार्च 2018 से डैमोनस्ट्रेटर के तौर पर काम कर रहा है और जिला संगरूर के तीन गांवों कनोई, तुंगा, उप्पली के किसानों को पराली से पर्यावरण को होने वाले दुष्प्रभावों प्रति जागरूक कर रहा है।

    उसने बताया कि इस साल गांव तुंगा में लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्रफल में गेहूं की बिजवाई रोटावेटर और हैपी सिडर के साथ करवाई जा रही है। अपनी सफलता की कहानी बयान करते गुरसेवक सिंह ने बताया कि उसने वर्ष 2016 में फसलों की अवशेष को आग न लाने का फैसला किया था। इस साल उसने 13 एकड़ क्षेत्रफल में गेहूं की बिजाई धान के बचे अवशेष में हैपी सिडर के साथ की है और उसे औसतन उत्पादन में लगभग 4-5क्विंटल प्रति एकड़ का विस्तार होने की उम्मीद है।

    फसल अवशेष खेतों में फैलाने से खर्च कम होने व उत्पादन बढ़ने का दावा

    गुरसेवक ने दावा किया कि उसके कृषि खर्च भी कम हुए हैं। उसने बताया कि हैपी सिडर के साथ बिजाई करने से पहले उसके खेत में बंजरपन की मात्रा बहुत अधिक थी, परंतु गेहूं के अवशेष व धान की पराली को खेत में ही नष्ट करने से जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ी है। गुरसेवक सिंह ने बताया कि उसके पास 4-5 पशु हैं, जिनके गोबर से तैयार कूड़े का ढेर खाद उसकी तरफ से खेतों में इस्तेमाल किया जाता है।

    गुरसेवक सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 -19 दौरान पंजाब सरकार की ओर से पराली के उचित प्रबंधन के लिए चलाई क्रॉप रैजीड्यू मैनेजमेंट (सीआरएम) स्कीम अधीन भुल्लर कृषि स्व -सहायता ग्रुप, गांव खुराना ने गांव में कस्टम हायरिंग सैंटर स्थापित करने के लिए कृषि मशीनरी (चौपर, हैपी सिडर और रोटावेटर आदि) 80 प्रतिशत सब्सिडी पर ली हुई है, जिसका गांव के किसान पूरा लाभ उठा रहे हैं।

    युवा किसान से शिक्षा लें अन्य किसान : डीसी | Commendable Effort

    • डिप्टी कमिशनर संगरूर घनश्याम थोरी ने जिले के किसानों को
    • गुरसेवक सिंह जैसे युवा किसानों से शिक्षा लेने की अपील की।
    • उन्होंने कहा कि किसान पराली प्रबंधन के लिए पंजाब सरकार की स्कीमों का अधिक से अधिक लाभ लें,
    • जिससे मिशन तंदरूस्त पंजाब को पूरी तरह सफल बनाया जा सके।

    पराली जलाने से परहेज करें किसान : मुख्य कृषि अधिकारी

    मुख्य कृषि अधिकारी संगरूर डॉ. जसविन्दरपाल सिंह ग्रेवाल ने बताया कि धान की पराली व गेहूँ के अवशेष को खेतों में आग लगाने से जहां जमीन की उपजाऊ शक्ति और लाभकारी जीवाणुओं का नुक्सान होता है, वहीं पर्यावरण भी दूषित होता है। इस लिए किसान पराली साड़न से गुरेज करें।

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