कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Kairana News: वरिष्ठ आलिम-ए-दीन और मिली काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल्ला मुगीसी के इंतकाल की खबर से दीनी और इल्मी हलकों में गहरा शोक व्याप्त है। मरहूम के ईसाल-ए-सवाब के लिए मदरसों, मकातिब और मसाजिद में कुरआन करीम की तिलावत की गई। वहीं, स्थानीय स्तर पर मदरसा इशाअतुल इस्लाम, अहसन उलूम और जामा मस्जिद समेत शहर व आसपास के कई दीनी संस्थानों में शोक सभाएं आयोजित कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत की गई। इस मौके पर मौलाना बरकतुल्लाह अमीनी, मौलाना मोहम्मद ताहिर और कारी मोहम्मद अनीस ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की और सब्र की दुआ की। मौलाना बरकतुल्लाह अमीनी ने बताया कि मौलाना अब्दुल्ला मुगीसी जिला सहारनपुर के गांव घघरौली के निवासी थे।
उन्होंने लगभग 65 वर्ष पूर्व मेरठ के गांव आजराड़ा में पहुंचकर मदरसा गुलजार हुसैनिया की स्थापना की थी, जो आज एक बड़े दीनी व शैक्षिक संस्थान के रूप में देश-विदेश में प्रसिद्ध है और अजराड़ा गांव को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आगे बताया कि मरहूम मिली काउंसिल के अध्यक्ष होने के साथ ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सम्मानित सदस्य भी थे। वह मुस्लिम गुर्जर बिरादरी से ताल्लुक रखते थे और बिरादरी के एक मजबूत स्तंभ माने जाते थे। मौलाना ने शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ेपन को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास किए। साथ ही, समाज में फैल रही बुराइयों को खत्म करने में भी अहम भूमिका निभाई। दीनी सेवाओं के साथ-साथ वह सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में भी एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। मौलाना अमीनी ने कहा कि मौलाना जाहिद हसन ब्रुहिमी और मौलाना कामिल कांधलावी के बाद मौलाना मुगीसी एक लोकप्रिय और सम्मानित शख्सियत के रूप में उभरे। उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। शोक सभाओं में मौजूद उलेमा ने मरहूम के मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया और उनकी सेवाओं को हमेशा याद रखने की बात कही। Kairana News
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