Param Pita Shah Satnam Ji: बात 1984 की है, उत्तर प्रदेश में हुए एक सत्संग के दौरान पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने बताया ‘‘26वें सत्संग पर हमारा गला बैठ गया और बुखार भी था फिर भी हमने उसी तरह सत्संग किया। शरीर भी साथ नहीं दे रहा था लेकिन साथ की साथ हम यह सोचकर मलोट सत्संग करने चले गए कि यदि हम सत्संग करने ना गए तो संगत निराश होकर वापिस चली जायेगी।’’ आप जी ने 104 डिग्री बुखार होने के बावजूद सत्संग फरमाया। आप जी साध-संगत की सेवा के लिए अपनी सेहत की परवाह ना करते। कई बार सेवादार अर्ज करते कि आप जी सत्संग रद्द कर दें तो आप जी फरमाते, ‘‘पता नहीं साध-संगत कब से हमारा इन्तजार कर रही होगी और हम नहीं पहुँचे तो उनका दिल टूट जायेगा’’। MSG Maha Rahmokaram Month
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