नई दिल्ली। New Delhi: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य कूनो नेशनल पार्क में तीन साल पहले भारत आए अफ्रीकी चीते ने तीन शावकों के जन्म दिया है और अब दक्षिण अफ्रीका से लाये गये चीतों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गयी है। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि कुनो में दक्षिण अफ्रीका से लाये गये चीते ने तीन शावकों ने को जन्म दिया है। उन्होंने इस पर खुशी व्यक्त करते हुए शावकों का स्वागत किया और कहा कि दक्षिण अफ्रीका से चीतों के आगमन के तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कूनो में एक नए अध्याय की शुरूआत हुई है।
उन्होंने लिखा “कूनो राष्ट्रीय उद्यान में उत्सव की गूंज सुनाई दे रही है क्योंकि दक्षिण अफ्रीका से आई चीता, गामिनी, जो दूसरी बार मां बनी है, ने तीन नए शावकों को जन्म दिया है। यह खुशी भरा आगमन भारतीय धरती पर चीतों के नौवें सफल प्रसव का प्रतीक है और जीवित भारतीय शावकों की संख्या को 27 तक पहुंचाता है। इन नए शावकों के साथ, भारत में चीतों की कुल आबादी अब 38 हो गई है-जो देश के दृढ़ और ऐतिहासिक संरक्षण प्रयासों का एक सशक्त उदाहरण है।” यादव ने आगे कहा “प्रत्येक जन्म प्रोजेक्ट चीता की नींव को मजबूत करता है और इस सपने को साकार करने वाले फील्ड स्टाफ और पशु चिकित्सा टीमों के जुनून, दृढ़ता और चौबीसों घंटे के समर्पण को दशार्ता है। कुनो और भारत के लिए यह गर्व का क्षण है-ईश्वर करे गामिनी और उसके तीनों नन्हे शावक मजबूत हों और देश में चीतों के पुनरुद्धार की कहानी को गति और गरिमा के साथ आगे बढ़ाएं। कूनो नेशनल पार्क में दूसरी बार मां बनी दक्षिण अफ्रीकी चीता गामिनी के इन तीन शावकों को जन्म दिया है। गामिनी इससे पहले मार्च 2024 में मां बनी और उसने छह शावकों को जन्म दिया था। New Delhi
यादव ने कहा कि इन नये शावकों के साथ, भारत में अफ्रीकी मूल के चीतों से पैदा हुए जीवित शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गयी है, जिससे भारत में चीतों की कुल संख्या 38 हो गयी है। इस महीने की शुरूआत में, सात फरवरी को, नामीबिया की चीता आशा ने कूनो में पांच शावकों को जन्म दिया, जिससे संख्या और बढ़ गयी। भारत में चीतों को फिर से लाने की कोशिश, प्रोजेक्ट चीता के तहत शुरू की गयी है, जिसका मकसद उस प्रजाति को फिर से जिÞंदा करना है जिसे 1952 में देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। इस प्रोजेक्ट को सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीतों को लाने के साथ औपचारिक रूप से शुरू किया गया था, इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को छोड़ा गया था। अब तक, अफ्रीका से कुल 20 चीतों को दूसरी जगह भेजा जा चुका है।” मंत्री के अनुसार, इस साल फरवरी में बोत्सवाना से आठ और चीतों के आने की संभावना है। आधिकारिक तारीख हालांकि अभी पता नहीं है। जब से यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ है, नौ बड़े चीते, जिनमें से चार नामीबिया से और पांच साउथ अफ्रीका से थे, दस बच्चों के साथ मर चुके हैं, जिससे इस प्रजाति को फिर से लाने में आने वाली पारिस्थितिकी और अनुकूलन चुनौतियों का पता चलता है।
यह भी पढ़ें:– मुजफ्फरपुर में विजिलेंस टीम की कार्रवाई, रिश्वत लेते पकड़ा गया दारोगा















