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    Chandrayaan-3 moon landing: चांद पर कदम, ऐतिहासिक उपलब्धि!

    Chandrayaan-3
    चांद पर कदम, ऐतिहासिक उपलब्धि!

    Chandrayaan-3 moon landing: चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतर चुका है। अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत जैसे विकासशील देश के लिए चंद्रमा पर पहुंचना एक ऐतिहासिक और अद्भुत उपलब्धि है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बाद चंद्रमा तक पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। मात्र 20 वर्षों में चंद्रयान की सफलता भारत की प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता को साबित करती है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत में वैज्ञानिकों की कोई कमी नहीं है। Chandrayaan-3

    भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रौद्योगिकी के विकास और उपयोग में पूरी विशेषज्ञता प्राप्त कर ली है। इससे पूर्व भी भारतीय वैज्ञानिकों ने विश्व भर के विभिन्न देशों के विकास के लिए काम किया है। एक विकासशील देश के लिए धन जुटाने के साथ-साथ प्रतिभाओं को अवसर देना कठिन होता है। चंद्रयान-3 की उपलब्धि के बाद भारतीय वैज्ञानिकों व इसरों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खुल गए हैं। पहले ही इसरो के माध्यम से कई देश अपने सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ चुके हैं, जिससे भारत को आर्थिक रुप से योगदान मिला है।

    पिछले लंबे समय से अमेरिका का अंतरिक्ष जांच केंद्र नासा विश्व भर के लिए आर्कषण का केंद्र बना हुआ है, लेकिन अब इसरो भी दुनिया के मानचित्र पर आ गया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि अब इसरो एक पर्यटन स्थल भी बन जाएगा। सभी वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं, जिनकी मेहनत और समर्पण रंग लाया है। इसरो को अगली परियोजनाओं के लिए अधिक वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए ताकि वैज्ञानिक आगामी नई खोजों को सफलतापूर्वक कर सकें। एक समय था जब इसरो के रॉकेटों पहुंचाने के लिए बैल गाड़ियों का प्रयोग किया जाता था।

    भारत के पास सीमित वित्तीय संसाधन थे। फिर भी इसरो ने प्रगति की और चंद्रमा तक पहुंच गया। यह भी बड़ी बात है कि चन्द्रयान-2 भी नाकामी के बावजूद वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी और मेहनत को जारी रखा। रूस जैसे देश की लूना-25 चंद्र परियोजना की विफलता के बावजूद इसरो के वैज्ञानिकों के हौंसले बुलंद रहे।

    यह घटनाक्रम यह भी साबित करता है कि आत्मविश्वास और साहस बहुत महत्वपूर्ण है, यदि कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया जाए तो प्रगति निश्चित है। यह भी आवश्यक है कि प्रकृति की गहराई को समझने के साथ-साथ प्रकृति के संतुलन के प्रति जागरूक रहना भी आवश्यक है। प्रकृति के वरदान को अवश्य खोजा जाए, लेकिन प्रकृति के चक्र को भी साथ-साथ बरकरार रखा जाए। यह विश्व के अन्य ताकतवर देशों के लिए भी आवश्यक है कि प्रकृति के साथ रिश्ता मित्रता व सद्भावना भरा हो। Chandrayaan-3 moon landing

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