हमसे जुड़े

Follow us

29.1 C
Chandigarh
Tuesday, March 17, 2026
More

    अनमोल वचन : मन को सीधा करना ही असल गैरत: पूज्य गुरु जी

    Anmol Vachan

    सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि एक इंसान जब भी राम-नाम छोड़ देता है तो उसके अंदर की भावना बुरी तरह से मर जाती है। इंसानियत को भूला हुआ इंसान शैतान बन जाता है। वह अपने दिमाग के तंग दायरे में इस तरह कैद हो जाता है कि उसे किसी की भी बात अच्छी नहीं लगती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब मन बुराई पर आता है तो वह सारे दरवाजे बंद कर देता है, जिससे इंसान को रास्ता न मिल सके।

    समझाने वाले समझाते हैं, लेकिन जिस तरह से औंधे घड़े पर पानी का लेश मात्र असर नहीं होता उसी तरह से मन के मारों का भी यही हाल होता है। कई लोगों को यह पता नहीं होता कि गैरत, अणख किसे कहते हैं? इंसान सोचता है कि मैं बड़ा गैरतमंद हूं, मैं जिस बात पर अड़ गया पता नहीं मैं कितना अच्छा हूं। अणख-गैरत है तो मन को सीधा करके दिखा, बुराई से हटकर दिखा। अणख-गैरत है तो इस कलियुग में अल्लाह, वाहेगुरु, राम के नाम पर चलकर दिखा और नेक-भले कर्म करके दिखा। इसे अणख कहते हैं।

    मन के पीछे लगकर संतों के वचनों को काटते रहना अणख नहीं बल्कि अहंकार होता है। आप जी फरमाते हैं कि अहंकार और अणख में दिन-रात का अंतर होता है। अणख और अहंकार दो अलग-अलग चीजें हैं, जो अहंकार को अणख-गैरत समझ लेते हैं वो जिंदगी में खज्जल-ख्वार होते रहते हैं। इसलिए अपने अंदर की आवाज को पहचानो। संतों के सामने ज्यादा अहंकार न करो क्योंकि अहंकार आपको ले डूबेगा, उनका कुछ नहीं जाएगा। संत मन से रोकते हैं, मनमते न बनो, मनमते लोगों का संग न करो। कई लोगों को मनमते लोगों का संग ही अच्छा लगता है और रूहानियत का संग अच्छा नहीं लगता। यह इंसान की मर्जी है, लेकिन सच यह है कि गैरत है तो मन को सीधा करो, अपने बुरे विचारों से लड़ो। इसके अलावा सब अहंंकार है।

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramLinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।