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    भगत सिंह को लेकर बेहूदा टिप्पणी

    Shaheed Bhagat Singh
    Shaheed Bhagat Singh

    लोकसभा क्षेत्र संगरूर से विजेता सिमरनजीत सिंह मान द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह को आतंकी कहना बेहद शर्मनाक व बेहुदा टिप्पणी है। भगत सिंह को देशवासियों ने अमर शहीद के खिताब से पुकारा है। वे 135 करोड़ लोगों के महानायक, शहीद व लोकप्रिय नेता हैं। सरकारी कागजों में शहीद का रूतबा भले ही अभी भगत सिंह को नहीं दिया। लेकिन वे युवाओं के दिलों की धड़कन हैं। प्रधानमंत्री से लेकर लगभग सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री व अधिकारी शहीद-ए-आजम के जन्मस्थल खटकड़ कलां व शहीद के समाधि स्थल हुसैनीवाला में पहुंचकर शहीद को नमन करते हैं। जहां तक शहीद को आतंकी कहने के लिए उनके हिंसक होने का तर्क देने का सवाल है यह बात हास्यप्रद टिप्प्णी है। ऐसी बात केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसने शहीद भगत सिंह के विचारों, सिद्धांतों व कार्यों का अध्ययन न किया हो।

    शहीद भगत सिंह ने कहीं भी हिंसा को इंकलाब का रास्ता नहीं बताया। जोश में उठाए गए प्रयासों का अपना अर्थ व प्रसंग रहता है। शहीद भगत सिंह द्वारा अंग्रेज पुलिस अफसर सांडरस की हत्या व असेंबली में बम फेंकने जैसी घटनाओं का गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता है। वास्तव में जिस प्रकार से लाला लाजपत राय पर अंग्रेजों ने अत्याचार ढहाए व मौत के घाट उतारा था वह बेहद क्रूर घटना थी। इस घटना के विरोध में शहीद भगत सिंह ने लाला जी की मौत के जिम्मेदार अधिकारी स्कॉट की हत्या कर अंग्रेजों को हिंसा न करने का संदेश देना चाहते थे। हर अंगे्रज की हत्या करना भगत सिंह की मंशा नहीं थी। स्कॉट के खिलाफ कार्रवाई एक सांकेतिक कार्रवाई थी। शहीद भगत सिंह ने कहीं भी युवाओं को यह संदेश नहीं दिया कि जहां भी अंग्रेज मिलें उन्हें मार दो। आतंकी हिंसा को बढ़ावा देते हैं व उनका उद्देश्य केवल हत्या करना होता है।

    आतंकी महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को मारने से भी नहीं झिझकते। शहीद भगत सिंह को छोड़िए बेवजह हिंसा उनके किसी साथी ने भी नहीं की। भगत सिंह का उद्देश्य व्यवस्था को बदलना था। जहां तक पॉर्लियामेंट में बम धमाके का संबंध है भगत सिंह ने बम फेंकने के तुरंत बाद सरेआम ऐलान किया था कि उनका उद्देश्य किसी अंग्रेज को मारना नहीं बल्कि गूंगी-बहरी सरकार के कान खोलना था। संकीर्ण सोच रखने वाले नेताओं के शहीदों के बारे में विवादित बयान शहीदों के रूतबे को कम नहीं कर सकते। शैक्षिक पुस्तकों में शहीद की कुर्बानी का गुणगान ही सबकुछ कहता है। बेहतर हो केंद्र व राज्य सरकारें भी महान देश भक्तों को शहीदों का दर्जा दें ताकि किसी भी तरह के सैद्धांतिक व कानूनी भ्रम की स्थिति न रहे। सरकारें शहीदों के साथ-साथ उनके परिवारों का भी सम्मान करती हैं, ताकि शहीदों की प्रतिष्ठा में कोई कसर बाकी न रहे।

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