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Sunday, February 8, 2026
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    बिना चीरा लगाए ढाई साल के बच्चे के दिल में छेद की सफल सर्जरी

    जन्म से ही ह्दय की बीमारी से ग्रस्त था बच्चा

    • अब बच्चे के ह्दय का आकार हो गया है सामान्य

    गुरुग्राम(सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। जन्म से ही ह्दय की बीमारी से ग्रसित एक बच्चे के दिल की सर्जरी करके उसे जीवनदान दिया गया है। मात्र ढाई साल के बच्चे के दिल में जन्म से ही छेद था। इसलिए उसका शारीरिक विकास नहीं हो पा रहा था। सर्जरी के बाद बच्चे का जीवन और उसके ह्दय का आकार सामान्य हो गया है। वह पूरी तरह से ठीक है। खास बात यह है कि इस सर्जरी प्रक्रिया के दौरान बच्चे के शरीर में कोई चीरा नहीं लगाया गया। पारस अस्पताल के पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. दीपक ठाकुर के मुताबिक जब बच्चे को अस्पताल में लाया गया तो उसका का वजन मुश्किल से 8 किलोग्राम था। इससे पहले उसे शहर के अन्य बाल रोग अस्पतालों में ले जाया गया था। बच्चे की छाती में बार बार इन्फेक्शन हो रहा था। इसके अलावा उसमें जन्मजात हृदय की बीमारी होने से उसका विकास बाधित हो गया था।

    कार्डिएक साइंस डिपार्टमेंट ने बच्चे की विस्तार से जांच की। फिर जो बच्चे को समस्या थी उसके लिए समाधान सुझाया गया। जांच में पता चला कि बच्चे के दिल में छेद है। बच्चे के माता-पिता को उसके बचे जीवन के स्थायी इलाज के लिए एक बार इंटरवेंशन प्रक्रिया को करवाने की सलाह दी गई। बाल रोग विशेषज्ञों ने जन्मजात हृदय की बीमारी को ठीक करने के लिए प्रक्रिया को अंजाम दिया। यह पूरी प्रक्रिया आधे घंटे चली। बच्चे को सिर्फ प्रक्रिया के दौरान ही बेहोश किया गया था। इस दौरान कोई वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी। प्रक्रिया के तुरंत बाद हृदय के कामकाज में सुधार देखने को मिला। उसके हृदय का आकार नॉर्मल हो गया। प्रक्रिया के एक घंटे बाद बच्चा पूरी तरह से होश में आ गया और वह फिर दूध भी पीने लग गया था।

    समय पर उपचार नहीं होता तो रुक सकती थी ह्दय गति

    डॉ. दीपक ठाकुर के मुताबिक अगर बच्चे में बीमारी का इलाज लंबे समय तक नहीं होता तो उसकी हृदय गति रुकने की संभावना भी बहुत ज्यादा थी। पेटेंट डक्टस आटेरीओसस एक प्रकार की हृदय की समस्या होती है। इस बीमारी को आसान भाषा में दिल में छेद के रूप में जाना जाता है। जन्मजात हृदय बीमारी होने पर बच्चों के हृदय के आकार या कामकाज में समस्या आ जाती है। यह समस्या होने से हृदय, फेफड़ों और शरीर के माध्यम से खून का प्रवाह प्रभावित होता हैं। इस वजह से सांस लेने में कठिनाई, अपर्याप्त वजन बढ़ना, शरीर का नीला पड़ना, दूध पीने में कठिनाई होना, हार्ट डिस्फंक्शन, हाई ब्लड प्रेशर और असामान्य दिल को धड़कन जैसे लक्षण महसूस होते हैं।

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