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    बिना पराली जलाए खेती कर दोगुना मुनाफा कमा रहा सुखदेव सिंह

    Farmer Sukhdev Singh

    35 एकड़ जमीन पर मूंग, मक्की, आलू, गन्ना, देसी चने व सब्जियों की करता है खेती

    • घर में रखे 60 दुधारू गाय, नेसले कंपनी खरीदती है दूध

    अहमदगढ़ (सच कहूँ/ मनदीप सिंह)। पर्यावरण को बचाने की खातिर जहां भूजल स्तर के गिरते स्तर को रोकना जरूरी है, वहीं फसलों के अवशेषों को आग न लगाना भी जरूरी है। अवशेषों के जलने से पैदा होने वाले धुएं के कारण वातावरण काफी प्रभावित होता है। मालेरकोटला जिले के ब्लाक अहमदगढ़ के गांव झुनेर का प्रगतिशील किसान सुखदेव सिंह बिना पराली व नाड़ जलाए गेहूं व धान की खेती कर रहा है। उसके पास 35 एकड़ जमीन है। इसमें से पांच एकड़ अपनी व तीस एकड़ ठेके पर ली है। वह मूंगी, मक्की, आलू, गन्ना, देसी चने व सब्जियों की खेती करके दोगुनी आमदन ले रहा है। किसान ने बताया कि इस वर्ष छह एकड़ जमीन पर गेहूं के नाड़ को बगैर जलाए मूंगी की काश्त की है। छह एकड़ में धान की सीधी बुआई करने का मन बनाया है।

    उसने सात एकड़ पर डायमंड आलू बीजा है। इसके अलावा गन्ना बीजकर कुलहाड़ी के जरिए उसका गुड़ बनाकर मुनाफा ले रहा है। देसी चने बगैर किसी रसायन के उगाता है। उसने दो एकड़ में खीरे उगा रखे हैं। किसान ने बताया कि उसके पास 60 दुधारू गाय हैं। उनके लिए पौष्टिक चारे के लिए 27 एकड़ में मक्की का आचार डाला है। नेसले कंपनी उसके पशुओं का दूध खरीदती है। उसके डेयरी फार्म पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। इनमें धार निकालने वाली मशीन व चीलिग फ्रिज आदि मौजूद हैं। ऐसे में सुखदेव सिंह अन्य किसानों के लिए मिसाल बना हुआ है। किसान ने बताया कि सोसायटी से प्राप्त हुए मल्चर व पलाओं की मदद से पराली न जलाकर उसे मिट्टी में मिलाकर खाद का काम ले रहा है। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति में बढ़ोतरी हुई है।

    सीधी बुआई किसानों के लिए फायदेमंद

    कृषि विकास अधिकारी डॉ. कुलबीर सिंह ने बताया कि कृषि व किसान भलाई विभाग समय-समय पर खेती कैंप लगाकर किसानों को धान की सीधी बुआई हेतु प्रेरित किया जा रहा है। सीधी बुआई किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। इसमें खेत को पानी से भरने की जरूरत नहीं होती। बुआई के बाद गेहूं की तरह पानी लगाया जाता है। इस तकनीक से लेबर द्वारा लगाई धान की बजाय अधिक पैदावार होती है।

    पर्यावरण की सुरक्षा के लिए योग्य कदम उठाने की जरूरत है। सभी को मिलकर काम करना होगा। तभी पर्यावरण को संभाला जा सकता है। खेती को जहर मुक्त करने के लिए पराली की संभाल, पानी, लेबर व डीजल की लागत कम करने के लिए सीधी बुआई किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। पराली में सुपरसीडर, हैप्पीसीडर, मलचर से गेहूं व धान बोने को जागरूक किया जा रहा है।
    -सुखप्रीत सिंह सिद्धू, एडीसी मालेरकोटला

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