देशद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, अब जुलाई में होगी सुनवाई

Sedition Law sachkahoon

नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को झटका देते हुए देशद्रोह कानून पर रोक लगा दी है। अब इसके तहत नए मामले दर्ज नहीं हो सकेंगे। इसके अलावा पुराने मामलों में भी लोग अदालत में जाकर राहत की अपील कर सकते हैं। अब इस मामले में जुलाई के तीसरे हफ्ते में सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य बातें

  • देशद्रोह का आरोपी जमानत की अर्जी दे सकता है।
  • जुलाई के तीसरे हफ्ते में फिर से होगी सुनवाई।
  • देशद्रोह का कोई नया केस दर्ज न हो।
  • नागरिकों की रक्षा ज्यादा जरूरी।
  • लंबित मामलों को अभी स्थगित रखा जाए।
  • केन्द्र की ओर से राज्यों को निर्देश जारी किया जाएगा।

क्या है देशद्रोह

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि देशद्रोह क्या है? सरकार का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना या बदलाव की मांग करना हर नागरिक का अधिकार है लेकिन देश की सत्ता को गैरकानूनी तरीके से चुनौती देना देशद्रोह की कैटिगरी माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के वकील डी. बी. गोस्वामी ने बताया कि देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल संगठन को बैन कर दिया जाता है। इसके तहत ही माओवादी और दूसरे अलगाववादी संगठनों को बैन किया गया है। आमतौर पर ऐसे संगठनों से संबंध रखनेवालों के खिलाफ देशद्रोह या इससे संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज होता है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आरोपी का अपराध किस तरह का है।

आईपीसी की धारा-121 में देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने वालों (आतंकवादी गतिविधियों में शामिल) को सजा दिए जाने का प्रावधान है। अगर कोई शख्स भारत के खिलाफ युद्ध करता है या ऐसी कोशिश करता है या ऐसे लोगों को बढ़ावा देता है तो उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है। वहीं ऐसे किसी अपराध के लिए साजिश रचने पर धारा-121 ए के तहत सजा दी जाती है, जो 10 साल या अधिकतम उम्रकैद हो सकती है। यह जानना जरूरी है कि अनजाने में भी किसी को ऐसे संगठन या ऐसी विचारधारा वाले लोगों से संपर्क नहीं रखना चाहिए। ऐसे लोगों के साथ किसी भी तरह की सांठगांठ रखनेवालों को इस मामले में दोषी करार दिया जा सकता है।

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