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Saturday, February 7, 2026
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    हजारों अध्यापकों ने रोष के तौर पर राज्य भर के स्कूलों में लगाए ‘काले बिल्ले’

    Protest

    शिक्षा मंत्री की ओर से बोले गए अपशब्दों के खिलाफ अध्यापकों में भारी रोष | Protest

    पटियाला(सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर)। डेमोक्रेटिक टीचर्ज फ्रंट पंजाब के आह्वान पर राज्य भर के बड़ी संख्या अध्यापकों ने ‘काले बिल्ले’ (Protest) लगाकर शिक्षा मंत्री द्वारा बोले गए अपशब्दों का विरोध जताया। डेमोक्रेटिक कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर मिड-डे-मील कुक वर्करों ने इस विरोध का हिस्सा बनते अध्यापकों के मान सम्मान की बहाली की मांग को लेकर समर्थन दिया। डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट पंजाब के राज्य अध्यक्ष दविन्दर पूनिया और जनरल सचिव जसविन्दर झबेलवाली ने बताया कि शिक्षा मंत्री की ओर से पंजाब के आम परिवारों के बेरोजगार बच्चों प्रति बुरी शब्दावली प्रयोग त कर कांग्रेस सरकार की राजनीति का असली चेहरा नंगा कर दिया है। शिक्षा मंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई अनैतिक शब्दावली ने पंजाब के लोगों का सिर नीचा किया है, वहीं सरकारों की आम लोगों की समस्याओं प्रति पहुंच का दिखावा भी किया है।

    उनकी अनैतिक हरकत का डेमोक्रेटिक टीचर्ज फ्रंट की ओर से तीखा नोटिस लेते पंजाब के अध्यापकों को काले बिल्ले लगा कर इसका विरोध प्रदर्शन करने का न्योता दिया गया था, जिसका समर्थन करते न सिर्फ अध्यापकों ने बल्कि अन्य कर्मचारियों जिनमें नान टीचिंग स्टाफ और मिड-डे-मील वर्करों ने भी पूरे पंजाब में पचास हजारों से अधिक संख्या में काले बिल्ले लगा कर विरोध प्रकट किया। इन प्रदर्शनों दौरान अलग स्थान पर प्रांतीय अधिकारी विक्रम देव सिंह, अश्वनी अवस्थी, धर्म सिंह लुधियाना, राजीव बरनाला, ओम प्रकाश मानसा, जग्पाल बंगी, डेमोक्रेटिक कर्मचारी फेडरेशन के राज्य अध्यक्ष प्रधान भुपिन्दर वड़ैच, राज्य सचिव जरमनजीत सिंह और डीटीएफ नेता अश्वनी टिब्बा, हरजिन्दर व बड़ी संख्या में अध्यापक और कर्मचारी नेता मौजूद थे।

    शिक्षा मंत्री विजय इंद्र सिंगला इस मामले में तुरंत बिना किसी शर्त मांगें माफी | Protest

    डेमोक्रेटिक टीचर्ज फ्रंट पंजाब की तरफ से प्रिंसीपलों, स्कूल प्रमुखों, अध्यापकों और स्कूल के अन्य कर्मचारियों की ओर से किए गए रोष प्रदर्शन में शामिल होने पर उनका धन्यवाद किया और पंजाब सरकार से मांग की गई कि शिक्षा मंत्री विजय इंद्र सिंगला इस मामले में तुरंत बिना किसी शर्त माफी मांगें व नैतिक तौर पर शिक्षा विभाग की मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी से इस्तीफा दें।

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