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    माहौल पक्ष में होने का विधानसभा चुनाव में मिलेगा फायदा: सोनिया

    Sonia Gandhi
    Sonia Gandhi माहौल पक्ष में होने का विधानसभा चुनाव में मिलेगा फायदा: सोनिया

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज) कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद से माहौल कांग्रेस तथा विपक्षी दलों के पक्ष में है, इसलिए जिन राज्यों में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने है, वहां इसका लाभ चुनाव में मिल सकता है। श्रीमती गांधी ने संसद भवन परिसर में संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में बुधवार को कांग्रेस संसदीय दल की आम बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि संसद के बाहर और भीतर कांग्रेस अपने संदेश देने में पूरी तरह सफल हो रही है और प्रभावी तरीके से अपनी विचारधारा को लोगों तक पहुंचा रही है।

    उन्होंने कहा कि जो नए सदस्य चुनकर आए हैं, उन्हें भी प्रभावित तरीके से हर जगह पार्टी का संदेश पहुंचाना है और कांग्रेस को मिलकर सबको मजबूती से आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि यह तब ही संभव हो सकता है, जब हम मजबूती से संसद तथा संसद के बाहर अपनी आवाज लगातार बुलंद करते रहेंगे। उन्होंने सरकार पर किसानों और विशेषकर युवाओं की ज्वलंत मांगों को पूरी तरह से नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि बजट में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आवंटन से न्याय नहीं किया जा रहा है। सरकार बजट को लेकर बहुत कुछ कह रही है, लेकिन सच यह है कि बजट को लेकर व्यापक निराशा है।

    श्रीमती गांधी ने कहा कि देश में बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है और देश का आम नागरिक सरकार पर भरोसा नहीं कर रहा है, जबकि पूरा सरकारी तंत्र देश की जनता को भरमाने में लगा हुआ। उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद थी कि मोदी सरकार लोकसभा चुनावों में सीट कम होने से सबक लेगी, लेकिन वह अब भी समुदायों को विभाजित करने और भय तथा शत्रुता का माहौल फैलाने की अपनी नीति पर कायम हैं। अच्छा यह हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने सही समय पर हस्तक्षेप किया, लेकिन यह अस्थायी राहत है। नौकरशाही को आरएसएस की गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देने के लिए नियमों को बदल दिया गया है। आरएसएस खुद को एक सांस्कृतिक संगठन कहता है लेकिन पूरी दुनिया जानती है कि यह भाजपा का राजनीतिक और वैचारिक आधार है। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। देश को आगे ले जाने की बजाय पूरी शिक्षा व्यवस्था को दोषपूर्ण बताया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं से लाखों युवाओं का विश्वास टूट गया है और उनका भविष्य अंधेरे में जा रहा है।

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