बरनावा में हर्षोउल्लास से मनाया एमएसजी अवतार माह का भंडारा

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Barnawa बरनावा में हर्षोउल्लास से मनाया एमएसजी अवतार माह का भंडारा

बरनावा रकम सिंह। डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही परमपिता शाह सतनाम जी महाराज के पावन 107वें अवतार माह के उपलक्ष में आज रविवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की साध-संगत ने एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केन्द्र शाह सतनाम जी डेरा बरनावा, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) में एमएसजी भंडारा हर्षोल्लास से मनाया। पावन एमएसजी भंडारे को लेकर साध-संगत में भारी उत्साह देखने को मिला। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गत रात्रि से ही श्रद्धालुओं का आना प्रारंभ हो गया था और भंडारे की समाप्ति तक भी साध-संगत का आना अनवरत जारी रहा।

सुबह 11 बजे पावन एमएसजी भंडारे के नामचर्चा सत्संग की शुरूआत हुई। इस अवसर पर समूह साध-संगत ने पवित्र नारा धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा के रूप में पूज्य गुरु जी को इस शुभ अवसर की बधाई दी। वहीं कविराजों ने पावन अवतार माह के भजनों से समां बांध दिया। इस अवसर पर पूरे डेरे को भव्य लड़ियों, रंग-बिरंगी झंडियों और पावन स्वरूपों से भव्य रूप से सजाया गया। साध-संगत ने बड़ी-बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन अनमोल वचनों को लाभ उठाया। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सच्चे दाता रहबर शाह सतनाम जी मालिक का ये अवतार महीना, एमएसजी भंडारे का महीना चल रहा है और साध-संगत खुशियों और नूर से मालोमाल है, मस्ती से मालामाल है। ये कोई आसान काम नहीं कि पौने सात करोड़ साध-संगत के चेहरे खुशी से खिले हुए हैं। इन सबके पीछे शाह मस्तान, शाह सतनाम जी दाता रहबर का रहमोकरम है। मालिक से ये ही दुआ है कि परमपिता परमात्मा साध-संगत को खुशियों से नवाजे। जो वचनों पर पक्के रहें, दृढ़ यकीन रखें उन्हें कोई कमी तो क्या सोचने तक की नोबत ना आए।

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सच्चे दाता रहबर शाह सतनाम जी महाराज के जितने गुणगान गाएं उतने कम हैं। परमपिता शाह सतनाम जी महाराज जलालआणा साहिब में आए, माता आस कौर जी, अति पूजनीय पिता वरियाम सिंह जी और वो धरा धन्य-धन्य, वो फिजां धन्य-धन्य, वो जमीं आसमां, जिन्होंने सबसे पहले दर्शन पाए। और धन्य हम और हमारी सारी साध-संगत जिसे दाता रहबर ने चरणी लगाया। और धन्य एक कण को, एक कतरे को समुंद्र ही नहीं महासागर बना देते हैं। एक नूर के जर्रे को सूरज नहीं बल्कि करोड़ों सूरजों की तरह चमका देते हैं।

तो ऐसे मुर्शिद-ए-कामिल, ऐसे दाता रहबर का अरबों-खरबों बार गुणगान गाएं, सजदा करें, नमन करें उतना कम है। गुण गाने जरूरी हैं, लेकिन सारी उम्र भी गाते रहें तो भी सतगुरु का गुण चुकाया नहीं जा सकता। तो हम सब लोग धन्य हुए क्योंकि दाता रहबर के दर्शन पाए और उस परमपिता परमात्मा ने धन्य बनाए तभी धन्य हुए। वरना पता नहीं कौन सा जीव कहां पर भटक रहा था। पता नहीं कितने युगों से आत्माएं भटक रहीं थी और अगर वो ना आते, बाजू ना पकड़ते तो भटकती ही रह जाती। तो शाह सतनाम जी दाता का जितना गुणगान गाएं उतना कम है।

इस दौरान पूज्य गुरु जी द्वारा चलाए जा रहे मानवता भलाई के 170 कार्यों में से एक ‘आशियाना’ मुहिम के तहत एक डॉक्यूमेंट्री चलाई गई, जिसके दर्शाया गया कि पूज्य गुरु जी व साध-संगत द्वारा अब तक हजारों मज़बूर दिव्यांगों, जरूरतमंदों को मकान बनाकर दिए जा चुके हैं और और ये सिलसिला लगातार जारी है। तत्पश्चात पूज्य गुरु जी द्वारा नशों के खिलाफ गाए गए गीत ‘मेरे देश की जवानी’ और ‘आशीर्वाद मांओ’ का चलाए गए, जिसे साध-संगत ने तन्मय होकर श्रवण किया। पावन एमएसजी अवतार माह के नामचर्चा सत्संग की समाप्ति पर लंगर समिति के सेवादारों ने लाखों की तादाद में आई साध-संगत को कुछ ही मिनटों में लंगर-भोजन और प्रसाद वितरित कर दिया।