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    राज रानी इन्सां की पार्थिव देह इलाही नारों एवं पुष्पवर्षा के साथ मेडिकल शोध को समर्पित की

    Sirsa News
    देहदानी को अंतिम विदाई देती साध-संगत व परिजन

    सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी जीते जी तो इंसानियत की सेवा करते ही हैं बल्कि मरणोपरांत भी इंसानियत की राह दिखा जाते हैं। इसी कड़ी में पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा शुरू की गई अमर सेवा मुहिम के तहत ब्लॉक कल्याण नगर स्थित परमार्थ कॉलोनी निवासी बहन राज रानी इन्सां पुत्री स्व. गुरदित्ता राम वधवा की पार्थिव देह को इलाही नारों एवं पुष्पवर्षा के बीच मेडिकल शोध कार्यों हेतु दान कर किया गया। बता दें कि 77 वर्षीय राज रानी इन्सां श्वासों रूपी पूंजी पूरी कर कुल मालिक के चरणों में सचखंड जा विराजी। Sirsa News

    उन्होंने पूज्य गुरु जी से नाम शब्द लिया हुआ था तथा पूज्य गुरु जी के पावन वचनों पर चलते हुए वे सेवा, सुमिरन एवं अन्य मानवता भलाई कार्यों में अग्रणी रहती थी। राज रानी के मरणोपरांत परिवारिक सदस्यों ने बिना किसी लोक-लाज की परवाह किए बगैर पार्थिव देह को अजय संगल इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज, शामली, उत्तर प्रदेश को दान किया। जहां उनकी मृत देह पर मेडिकल के छात्र शोध कार्य करेंगे। बता दें कि राज रानी इन्सां के भतीजे प्रवीन इन्सां और अशोक इन्सां एमएसजी आईटी विंग के कर्मठ सेवादार है जो लंबे समय से अपनी बुआ राज रानी इन्सां की बुजुर्ग अवस्था के चलते उनकी सेवा व सार संभाल कर रहे थे। उनका पूरा परिवार हमेशा मानवता भलाई कार्यों में अग्रणी रहता है।

    इलाही नारों एवं पुष्पवर्षा से दी अंतिम विदाई | Sirsa News

    शरीरदानी राज रानी इन्सां को अंतिम विदाई देने हेतु शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सदस्य, साध-संगत, परिजन एवं रिश्तेदार व गणमान्य लोगों सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। उपस्थितजनों ने सचखंडवासी राज रानी इन्सां अमर रहे एवं जब तक सूरज चांद रहेगा-राज रानी इन्सां तेरा नाम रहेगा के गगनभेदी नारे लगाकर, पुष्पवर्षा एवं सैल्यूट कर उनकी पार्थिव देह को फूलों से सजी एम्बूलेंस में अंतिम विदाई दी। इस मौके पर परिवारिक सदस्य रिझा भान वधवा, ईश्वर देवी (भाई-भाभी), कांता देवी (भाभी), बलदेव राज-चरणजीत (भतीजा), महेश कुमार-सीमा(भतीजा), प्रवीण कुमार-पलक(भतीजा), अशोक कुमार-रजनी वधवा (भतीजा), अनीता ग्रोवर-राजेश ग्रोवर (भतीजी), प्राउड, मुकुल वधवा, समरीन, पीहू, तनिश,भविश सहित अन्य रिश्तेदारों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

    अंतिम इच्छा का किया सम्मान

    इस मौके पर शरीरदानी के भतीजे प्रीवन इन्सां व अशोक इन्सां ने बताया कि राज रानी इन्सां ने अपने जीवनकाल में ही पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं से प्रेरित होकर मरणोपरांत शरीरदान का संकल्प लिया था और इसके लिए आवश्यक फॉर्म भी भर रखा था। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा के काम आए। प्रवीन व अशोक इन्सां ने बताया कि परिवार के लिए यह भावुक क्षण जरूर है, लेकिन उन्हें गर्व है कि वे राज रानी इन्सां की अंतिम इच्छा को पूरा कर सके। उन्होंने कहा, पूज्य गुरु जी की शिक्षा है कि इंसान को जीवन में ही नहीं, मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करनी चाहिए। राज रानी इन्सां ने इसी भावना के साथ शरीरदान का निर्णय लिया था और हमने उनकी इच्छा का सम्मान किया है।

    अंतिम इच्छा का किया सम्मान | Sirsa News

    इस मौके पर शरीरदानी के भतीजे प्रीवन इन्सां व अशोक इन्सां ने बताया कि राज रानी इन्सां ने अपने जीवनकाल में ही पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं से प्रेरित होकर मरणोपरांत शरीरदान का संकल्प लिया था और इसके लिए आवश्यक फॉर्म भी भर रखा था। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा के काम आए। प्रवीन व अशोक इन्सां ने बताया कि परिवार के लिए यह भावुक क्षण जरूर है, लेकिन उन्हें गर्व है कि वे राज रानी इन्सां की अंतिम इच्छा को पूरा कर सके। उन्होंने कहा, पूज्य गुरु जी की शिक्षा है कि इंसान को जीवन में ही नहीं, मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करनी चाहिए। राज रानी इन्सां ने इसी भावना के साथ शरीरदान का निर्णय लिया था और हमने उनकी इच्छा का सम्मान किया है।