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    उपभोक्ता बैंक में आया ही नहीं, फिर भी कैशियर ने खाते से निकाले 7.35 लाख, मामला उठा तो आनन-फानन में डाले वापस

    Sirsa News
    Sirsa News: बैंक के बाहर खाते की स्टेटमेंट दिखाती वृद्धा नसीब कौर।

    कैशियर ने अवैध रूप से 12 एंट्री में खाते से निकाले पैसे

    • 3 शाखा प्रबंधकों के कार्यकाल में हुई एंट्री

    ओढ़ां/सरसा (सच कहूँ/राजू)। Odhan News: उपभोक्ताओं की पैसा बैंकों में भी सुरक्षित नहीं रहा। उपभोक्ता बैंक में आया ही नहीं फिर भी उसके खाते से कैशियर द्वारा कथित रूप से लाखों रुपये की राशि इधर-उधर कर दी गई। मामला सुनने में कुछ अटपटा लग रहा होगा, लेकिन ये कारनामा सामने आया है गांव बडागुढ़ा में स्थित दी केन्द्रीय सहकारी बैंक की शाखा में। बैंक के कैशियर सुभाष ने कथित रूप से गबन के उद्देश्य से एक वृद्धा के खाते से लाखों रुपये की राशि निकालते कुछ अन्य खाते में ट्रांसफर कर दी और कुछ नकद निकलवा ली। मामला उस वक्त सामने आया जब वृद्धा नसीब कौर निवासी गांव बडागुढ़ा अपनी बेटी सुखपाल कौर के साथ बैंक में आई। Sirsa News

    जब वृद्धा ने अपनी पासबुक पूरी करवाई तो ट्रांजेक्शन देखकर उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। वृद्धा के खाते में 10 लाख 3 हजार रुपये की राशि थी। जिसमें से 7 लाख 35 हजार रुपये की राशि कम पाई गई। जब इस बारे वृद्धा ने पूछा तो उसे उत्तर मिला कि आपके खाते से उक्त राशि निकली। लेकिन वृद्धा ने जब यह कहा कि वह तो काफी समय से बैंक में आई ही नहीं, तो उक्त राशि कैसे कम हो गई। ये सुनकर शाखा प्रबंधक व अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल इस मामले में सीधे तौर पर बचते नजर आए। उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ना चाहा कि ये तकनीकी त्रुटि की वजह से हुआ है। Sirsa News

    जबकि सवाल ये है कि तकनीकी त्रुटि 1-2 बार हो सकती है। जबकि ऐसा 12 बार हुआ। वृद्धा व उसकी बेटी ने खाते की स्टेटमेंट निकलवाई तो उसमें पाया गया कि उसके खाते में से 12 बार में कुल 7 लाख 35 हजार रुपये निकाले गए हैं। जिसमें से कुछ तो एक अन्य खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। जबकि कुछ नकद निकलवाए गए हैं। बुधवार को इस मामले को लेकर वृद्धा व उसके परिजन बैंक में पहुंचे। इस दौरान पैसे को लेकर बैंक में काफी देर तक बहसबाजी होती रही। मामला मीडिया तक पहुंचने के बाद उपभोक्ता के खाते में उक्त राशि वापस ट्रांसफर भी कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक इस मामले की भनक लगते ही कैशियर सुभाष छुट्टी लेकर रफू-चक्कर हो गया। बुधवार को इस मामले को लेकर शाखा में काफी गहमा-गहमी रही। मौके पर मौजूद उपभोक्ता भी अपने खातों की राशि को लेकर चिंतित दिखे।

    वृद्धा नसीब कौर के मुताबिक उसने ये राशि अपनी दोहती की शादी के लिए जमा की थी। वह लंबे समय से बैंक में आई ही नहीं और न ही उसने वाउचर पर अंगूठा लगाया। अब सवाल ये खड़ा होता है कि जब वृद्धा ने अंगूठा या हस्ताक्षर किए ही नहीं तो उसके खाते से कैशियर ने इतनी राशि दूसरे खातों में कैसे ट्रांसफर कर दी। मौके पर मौजूद कैशियर बलवंत सिंह ने पूछे जाने पर ये कहा कि उसे इस बारे कोई जानकारी नहीं है। वह तो अभी 5-6 दिन पहले बैंक में आया है। ये राशि कैशियर सुभाष द्वारा ट्रांसफर की गई है। वहीं ये मामला चचार्ओं का केन्द्र बना हुआ है।

    12 एंट्री में निकले 7 लाख 35 हजार

    कैशियर सुभाष द्वारा मनी ट्रांसफर का ये खेल 4 जुलाई 2025 से शुरू किया गया। जिसमें वृद्धा नसीब कौर के खाते से 4 जुलाई 2025 को 50 हजार रुपये, 6 अगस्त 2025 को 50 हजार रुपये, 7 अगस्त 2025 को 50 हजार, 11 अगस्त को 2 लाख 50 हजार, 12 अगस्त 2025 को 46 हजार, 13 अगस्त 2025 को 33 हजार, 15 सितंबर 2025 को 23 हजार 500, 3 अक्टूबर 2025 को 22 हजार 500, 8 अक्टूबर 2025 को 35 हजार, 24 दिसंबर 2025 को 50 हजार, 29 दिसंबर 2025 को 50 हजार व 22 जनवरी 2026 को 10 हजार रुपये सहित कुल 12 एंट्री में 7 लाख 35 हजार रुपये की राशि निकाली गई।

    ये होता है प्रोसेस | Sirsa News

    उपभोक्ता जब बैंक में पैसे निकलवाने आता है तो उसे विड्रॉल फार्म भरकर उस पर अपने हस्ताक्षर या अंगूठा लगाकर पासबुक सहित फार्म कैशियर को देना होता है। फिर कैशियर द्वारा उस फार्म को आॅनलाइन रूप से वेरिफाई कर उस पर डीसी नंबर लगाया जाता है। फिर ये फार्म शाखा प्रबंधक के पास जाता है और शाखा प्रबंधक उसे वेरिफाई करता है। उसके बाद कैशियर द्वारा उपभोक्ता को राशि दी जाती है या फिर उपभोक्ता के कहने पर अन्य खाते में ट्रांसफर की जाती है। जबकि इस मामले में कैशियर द्वारा नियमों को दरकिनार कर पेमेंट ट्रांसफर कर दी गई।

    सूत्रों के मुताबिक कैशियर सुभाष ने कथित तौर पर उपभोक्ता के बैंक में आए बिना ही फर्जी रूप से शाखा प्रबंधक की आईडी से वेरिफाई करते हुए ये गोलमाल किया गया है। इस मामले में दूसरा बड़ा सवाल ये भी है कि अगर शाखा प्रबंधक इस मामले में शामिल नहीं है तो उन्होंने अपनी आईडी वेरिफिकेशन चैक क्यों नहीं की। बताया जा रहा है कि ये मनी ट्रांसफर का खेल मौजूदा शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल, तत्कालीन प्रबंधक बलवंत सिंह व धर्मपाल के समय में हुआ। अब देखने वाली बात ये है कि बैंक द्वारा इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

    मेरी अभी यहां पर पोस्टिंग हुई है। उपभोक्ता हमारे पास शिकायत लेकर आया था उसके खाते से राशि निकाली गई है। ये राशि कैशियर सुभाष द्वारा ट्रांसफर की गई थी। हां, गलती तो है हमने इस बारे स्थापना अधिकारी को अवगत करवाते हुए महाप्रबंधक सरसा को लिख दिया है। ये सब तकनीकी त्रुटि की वजह से हुआ। हमने अब राशि दोबारा उपभोक्ता के खाते में डाल भी दी है।
    – इन्द्रपाल, शाखा प्रबंधक (दी केन्द्रीय सहकारी बैंक शाखा बडागुढ़ा)

    ये मामला अभी तक मेरे ध्यान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। – ऋषिपाल, महाप्रबंधक (सीबी सरसा)

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