पांच हजार की आबादी निजी अस्पतालों में महंगे इलाज को मजबूर
महल कलां/बरनाला (सच कहूँ/जसवीर गहल)। Mehal Kalan News: जिला बरनाला के गांव बीहला स्थित सरकारी स्वास्थ्य डिस्पेंसरी पिछले कई वर्षों से भारी स्टाफ की कमी के कारण ‘सफेद हाथी’ साबित हो रही है। लगभग पांच हजार की आबादी वाले इस गांव के लोगों को सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी निजी क्लीनिकों या दूरदराज के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार डिस्पेंसरी में स्वीकृत पद होने के बावजूद दवा वितरक कर्मचारी लंबे समय से सरकारी अस्पताल बरनाला से अटैच है, जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी चन्ननवाल अस्पताल में तैनात है। केन्द्र सरकार की योजना के तहत नियुक्त कम्युनिटी हेल्थ आॅफिसर भी एक माह पूर्व भेजा गया था, लेकिन वह केवल एक-दो बार ही उपस्थित हुआ। वर्तमान में पूरा स्वास्थ्य केन्द्र केवल एक एएनएम के सहारे चल रहा है, जो प्रसूति, टीकाकरण और सीमित रूटीन जांच तक ही सेवाएं दे पा रही है। Barnala News
वहीं भारतीय किसान यूनियन डकौंदा धनेर इकाई के प्रधान अविदीप सिंह, कैशियर गुरलाल सिंह, खुश गिल सिंह और गुरविन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार भर्तियों के दावे तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में अस्पताल खाली पड़े हैं। मजबूरन लोगों को महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि बीहला के सब-स्टेशन को मोहल्ला क्लीनिक का दर्जा देकर डॉक्टर, स्टाफ और जांच मशीनों की तत्काल व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे संघर्ष करने को मजबूर होंगे।
मौजूद एएनएम करमजीत कौर ने बताया कि करीब छह वर्ष पहले डॉक्टर का तबादला होने के बाद आज तक कोई नया डॉक्टर नियुक्त नहीं किया गया। लैब जांच सुविधा न होने के कारण मरीजों को महल कलां, चन्ननवाल या बरनाला जाना पड़ता है। भवन की हालत भी जर्जर हो चुकी है। Barnala News
गांव की सरपंच सरबजीत कौर के पति किरनजीत सिंह मिंटू ने बताया कि पंचायत द्वारा कई बार स्वास्थ्य विभाग और सरकार से स्टाफ पूरा करने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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