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    भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता देश के किसानों व मजदूरों की रोजी रोटी छीनेगा: माकपा

    Naraingarh News
    Naraingarh News: माकपा जिला सचिव सतीश सेठी

    नारायणगढ (सचकहँ/सुरजीत कुराली)। Naraingarh News: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का विरोध करती है। माकपा जिला सचिव सतीश सेठी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि यह समझौता भारत के आर्थिक हितों को यूरोपीय संघ के सामने पूरी तरह से समर्पण करने जैसा है।

    इस समझौते की शर्तों के तहत, भारत यूरोपीय संघ से आयात होने वाले 90 प्रतिशत से ज़्यादा सामानों पर टैरिफ खत्म कर देगा या उनमें भारी कमी करेगा। इनमें ऑटोमोबाइल पर टेरिफ़ 110त्न से घटाकर 40त्न, लोहा और स्टील पर 22त्न से 0त्न, दवाइयों पर 11त्न से 0त्न, शराब और स्पिरिट पर 150त्न से 40त्न, तैयार भोजन (प्रसंस्कृत) पर 50त्न से 0त्न, और भेड़ के मांस पर 33त्न से 0त्न टेरिफ़ करना शामिल हैं। Naraingarh News

    टैरिफ में इतनी भारी कटौती के कारण, भारत के ऑटोमोबाइल, दवा और मशीनरी उद्योग बुरी तरह से प्रभावित होंगे। इस समझौता पर यूरोपीय संघ ने खुद अनुमान लगाया है कि कुछ ही सालों में भारत को उसका निर्यात 107.6 प्रतिशत बढ़ जाएगा। यही नहीं ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी आदि के आयात होने से भारत में रोजग़ार पर बुरा असर पड़ेगा।माकपा नेता सेठी ने कहा कि कारों और शराब की कम कीमत से सिर्फ़ अमीर लोगों को फायदा होगा, जबकि टैरिफ में कटौती से मज़दूरों, किसानों और आम लोगों की रोज़ी-रोटी छिन जाएगी।इसके अलावा, मुक्त व्यापार समझौते का मकसद भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे को मज़बूत करना है, जो इजऱाइल में हाइफ़ा बंदरगाह को एक मुख्य मध्यवर्ती स्थान के रूप में तय करता है।

    ऐसे समय में जब दुनिया इजऱाइल को एक रंगभेद वाला देश घोषित करने और गाज़ा में उसके नरसंहार वाले हमले के लिए उस पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही है, भारतीय सरकार इस मुक्त व्यापार समझौते के ज़रिए इजऱाइल के साथ संबंध मज़बूत कर रही है। यह निंदनीय है और इसकी इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। Naraingarh News

    भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अभी तक के सभी मुक्त व्यापार समझौतों में लगातार भारतीय किसानों और मज़दूरों के हितों की बलि दी है। इसलिए सीपीआई (एम) मांग करती है कि सरकार भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का पूरा मूल पाठ संसद के आने वाले बजट सत्र में रखे और उस पर पूरी चर्चा सुनिश्चित करते हुए किसानों, मज़दूरों और लोगों के हितों की रक्षा करे।

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