बदलना होगा शिक्षा का स्वरूप

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Online education is not childs play

यह स्थिति बेहद चिंताजनक और हमारी शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हुई है। कोलकता के एक सरकारी मेडिकल कालेज में मोरचरी यानी कि मुर्दाघर में शवों के रखरखाव के लिए प्रयोगशाला सहायक के छह पदों के लिए 8 हजार युवाओं ने आवेदन किए हैं। दरअसल आम बोलचाल की भाषा में कहे तो यह डोम का पद है। मजे की बात यह है कि इस पद के लिए शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास है और वेतन की देखों तो वो है केवल 15 हजार रुपया मासिक। यह आज की शिक्षा व्यवस्था, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और सरकारी नौकरी के प्रति लगाव की दृष्टि से देखा जा सकता है। आखिर सरकार की स्वरोजगार की अनेकों योजनाओं, स्टार्टअप योजना सहित कौशल विकास के विभिन्न कार्यक्रमों के बाद यह स्थिति है तो यह वास्तव में गंभीर चिंताजनक है।

यदि टेक्नोक्रेट इंजीनियरिंग पास है तो टेक्नोक्रेट कहना ही होगा और उच्च शिक्षित व्यक्ति आठवीं पास योग्यताधारी की नौकरी के लिए दो चार हो रहे हैं तो यह पढ़ाई के बाद भी उनके सोच को दशार्ती है। यह कोई पहली या आज की कोरोना बाद की स्थिति नहीं है। ऐसे उदाहरण हजारों मिल जाएंगे। हांलाकि आज स्थिति यह होती जा रही है कि एक पद के लाखों दावेदार हैं। ऐसे में कम पदों के लिए भर्ती भी मुश्किल भरा काम हो गया है। पर यह हालात आंखें खोलने के लिए काफी है। इंजीनियरिंग व प्रबंधन में डिग्री धारी युवाओं का सफाई कर्मचारी की नौकरी के लिए आवेदन करना देश की शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी की स्थिति दोनों से ही रुबरु कराने के लिए काफी है। यह तस्वीर पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश या राजस्थान की नहीं बल्कि समूचे देश में मिल जाएगी।

एक पद के लिए इतने अधिक आवेदन आते हैं और खासतौर से न्यूनतम योग्यता तो अब कोई मायने ही नहीं रखती, एक से एक उच्च योग्यताधारी आवेदकों में मिल जाते हैं। प्रश्न यह उठता है कि क्या बेरोजगारी की समस्या इतनी गंभीर है या हमारी शिक्षा व्यवस्था में ही कहीं खोट हैं या कोई दूसरा कारण है दरअसल इस के कई कारणों में से एक हमारी शिक्षा व्यवस्था, दूसरी हमारी शिक्षा का स्तर, तीसरी सरकारी नौकरी के प्रति युवाओं का आकर्षण आदि है। यह हमारी व्यवस्था की त्रासदी ही है। ऐसे में अब सरकार और समाज दोनों के सामने नई चुनौती आती है।

आखिर युवाओं का सरकारी नौकरी के प्रति मोहभंग कैसे हो यह सोचना होगा तो तकनीकी या रोजगारपरक शिक्षा देने वाले संस्थानों के निरीक्षण मापदंडों को सख्त बनाना होगा, संकाय सदस्यों के चयन उनके वेतन आदि को आकर्षक और सबसे ज्यादा जरुरी ऐसे संस्थानों की शिक्षण व्यवस्था को स्तरीय बनाना होगा ताकि देश में दक्ष योग्यताधारी युवाओं की टीम तैयार हो सके। योग्यताधारी युवाओं द्वारा मोरचरी में डोम या सफाई कर्मियों या चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों या लिपिक जैसे पदों के लिए आवेदन करना व्यवस्था पर तमाचें से कम नहीं है। देश में स्तरीय शिक्षण व्यवस्था और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास करने होंगे। युवाओं में एंटरप्रोन्योर बनने की ललक जगानी होगी।

 

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