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Friday, April 10, 2026
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    Private School News: किताबें, ड्रेस और स्टेशनरी में निजी स्कूलों की कमिशनखोरी का शर्मनाक खेल! अभिभावक मजबूर!

    Private schools will not be able to keep publishers' books of their own free will

    सस्ते विकल्प होने के बावजूद नहीं मिलती राहत, निजी स्कूलों ने फिक्स की दुकानें

    Private School News: सरसा (सच कहूँ न्यूज)। नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत के साथ ही जिले में निजी स्कूलों की मनमानी एक बार फिर सामने आई है। आरोप है कि कई स्कूलों ने किताबें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी की खरीद के लिए अपनी-अपनी दुकानें तय कर रखी हैं, जहां से ही अभिभावकों को सामान लेने के लिए मजबूर किया जाता है। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। Sirsa News

    स्कूल प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं कि निर्धारित दुकान से ही पूरा सामान खरीदा जाए। यदि कोई अभिभावक बाजार से सस्ता सामान खरीदने का प्रयास करता है, तो उसे हतोत्साहित किया जाता है या बच्चों को अप्रत्यक्ष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता है। खास बात यह है कि जिन दुकानों को स्कूलों ने तय किया है, वहां वही सामान बाजार की तुलना में अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है।

    स्कूलों द्वारा तैयार किए गए पैकेज में रजिस्टर, नोटबुक, स्क्रैप बुक, ड्राइंग बुक, कलर ब्रश और कवर जैसी सामग्री एक साथ दी जाती है। अभिभावकों का कहना है कि यह पैकेज अनावश्यक रूप से महंगा होता है, जबकि यही सामान बाजार में अलग-अलग दुकानों पर कम कीमत में उपलब्ध है। कई स्कूलों में स्कूल के नाम से छपी कॉपियां अनिवार्य कर दी गई हैं। इससे अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं बचता और उन्हें तय दुकान से ही खरीदारी करनी पड़ती है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन और दुकानदारों के बीच कमीशन का खेल चलता है, जिसके चलते कीमतें बढ़ाई जाती हैं। Sirsa News

    विभाग की कार्रवाई औपचारिकता तक सीमित | Sirsa News

    हर साल अभिभावकों और एसोसिएशनों की ओर से शिक्षा विभाग को शिकायतें दी जाती हैं, लेकिन कार्रवाई सीमित ही रहती है। शुरूआती दिनों में छापेमारी की औपचारिकता निभाई जाती है, इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। नतीजतन पूरे सत्र में निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें ही विद्यार्थियों को लेनी पड़ती हैं। अनुमान है कि इससे हर साल प्रति अभिभावक 5 से 6 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

    जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता साईं ने कहा कि स्कूलों के अंदर किताबें, ड्रेस या स्टेशनरी बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध है। कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी एक दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। यदि ऐसा पाया जाता है, तो संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    दाखिले के समय ही खुलती है दुकान | Sirsa News

    कुछ स्कूलों में तो परिसर के भीतर ही अस्थायी दुकानें संचालित की जाती हैं, जो केवल दाखिले के समय ही खुलती हैं। अभिभावकों को यहीं से किताबें, ड्रेस और स्टेशनरी लेने के लिए कहा जाता है, जिससे उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता। जिले के कई स्कूलों ने अपनी-अपनी दुकानें तय कर रखी हैं, जहां से ही सामान उपलब्ध कराया जाता है। इससे अभिभावकों की परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि वे अन्य दुकानों से खरीदारी नहीं कर पाते, जबकि वहां सामान सस्ता मिलता है।

    अभिभावक एसोसिएशन के प्रधान सौरभ मेहता का कहना है कि शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेश होने के बावजूद निजी स्कूल अपनी मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है।