नई दिल्ली। दिल्ली स्थित एक प्रतिष्ठित पंचसितारा होटल की नीलामी से जुड़े प्रकरण पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई करते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया और दिवाला संहिता (आईबीसी) के अनुपालन को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। यह मामला एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से न्यायालय के समक्ष आया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि संपत्ति के मूल्य निर्धारण और ऋण वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा। Supreme Court News
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि संपत्ति के मूल्यांकन में एकरूपता और निष्पक्षता अनिवार्य है। न्यायालय ने यह जानना चाहा कि बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मूल्यांकन की पद्धति क्या है और क्या वह आम नागरिकों के मामलों से भिन्न तो नहीं है। पीठ ने कहा कि यदि किसी ऋणी के पास बकाया राशि चुकाकर संपत्ति बचाने का अवसर है, तो उसे विधिसम्मत मौका मिलना चाहिए, परंतु संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी होनी आवश्यक है।
न्यायालय ने केंद्र सरकार से संबंधित होटल समूह के विरुद्ध की गई कार्यवाही, मूल्यांकन रिपोर्ट तथा दिवाला प्रक्रिया के सभी चरणों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही संबंधित बैंकों और कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप लगाया गया कि ऋण वसूली के दौरान संपत्ति का मूल्य जानबूझकर कम आंका गया, जिससे सार्वजनिक धन को क्षति पहुंच सकती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संसाधनों और बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोपरि है। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र और संबंधित पक्षों के उत्तरों के आधार पर आगे की दिशा तय की जाएगी। यह प्रकरण कॉरपोरेट ऋण निपटान और संपत्ति नीलामी में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Supreme Court News















