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Sunday, April 5, 2026
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    Badhauli: नूहार मेरे गांव की नारायणगढ-नोहनी मार्ग पर बसा गांव बधौली

    Badhauli News
    Badhauli News: गांव के प्रवेश द्वार पर बधौली बोर्ड, गांव में पशुओं के नहलाने व पानी पीलाने के लिए बना तालाब ,सीता राम का मन्दिर।

    बाबा बावा राम प्रसाद की नगरी के नाम से मशहूर है गांव बधौली

    नारायणगढ़ (सच कहूँ/सुरजीत कुराली)। Badhauli News: नारायणगढ से 17 किलोमीटर दूर नारायणगढ-नोहनी मार्ग पर बसा गांव बधौली जो कि बाबा बावा राम प्रसाद की नगरी के नाम से मशहूर है। गांव के प्रवेश द्वारा पर भी बाबा बावा राम प्रसाद की नगरी का एक बडा बोर्ड भी लगा हुआ है। बाबा बावा राम प्रसाद की याद में ग्रामवासियों ने एक मन्दिर भी बनवाया हुआ है जहां पर बाबा बावा राम प्रसाद की चरण पादुकायें रखी हुई है तथा बाबा की समाध है जिसे तमाम ग्रामवासी नमन करते हैं। गांव के बुजुर्ग कंवरपाल राजपूत व मौजूदा नम्बरदार जय कुमार के अनुसार यहां सिंघी राज हुआ करता था सिंघी नामक व्यक्ति लोगों को बहुत ही तंग किया करता था जो कि उसकी झडप एक दिन बाबा बावा राम प्रसाद के साथ हो गई तो बाबा ने सिंघी का कहाकि वह उसके साथ युद्व करे जो भी युद्व में विजयी होगा इस जगह पर उसकी का अधिकार होगा। Badhauli News

    बाबा ले सिंघी को पहला वार करने की चुनौति दे डाली उसके बाद बाबा द्वारा किये गये वार से सिंघी की मौत हो गई। और वहां बसे लोगों ने बाबा बावा राम प्रसाद का धन्यवाद किया और यह जगह बाबा बावा राम प्रसाद की नगरी नाम से यादगार बन गई। समय बीतता गया और लोग यहां आकर बसने लगे यहां बसे लोगों के पास 52 बीघा जमीन थी 52 बीघा जमीन होने के नाते इस इस जगह को बौवनी जगह भी कहा जाने लगा पड गया जो कि अब इस जगह का नाम बाबा बावा राम प्रसाद की नगरी बधौली पड गया।

    तीस सालों से कर रहे है सेवा:-

    महंत रामेश्वरदास ने बताया कि वह बाबा बावा राम प्रसाद की चरण पादुकायें व समाध की देखरेख पिछले तीस सालों से कर रहे हैं। ग्रामीणों के सहसोग से यहां पर साल में कंई भण्डारे का आयोजन भी किया जाता है। इसह जगह पर सीता राम का एक भव्य मन्दिर भी है। जहां पर सुबह सांय आरती होती है।

    गांव की आबादी है दस हजार | Badhauli News

    नम्बरदार जय कुमार ने बताया कि उनके गांव की आबादी लगभग दस हजार से अधिक है। तथा गांव में 4000 के करीब मतदाता हैं। गांव में अब तक जरनल व अनुसूचित जाति के ही सरपंच बने हैं। बधौली गांव में सबसे पहले सीता राम श्यामी मेहता नामक सरपंच बना था जो कि एक मिलनसार व्यक्ति था तथा हर ग्रामवासी के साथ दुख-सुख में हमेशा साथ उनके खडा रहता था। ग्रामवासी आज भी उस पूर्व सरपंच सीता राम श्यामी मेहता को याद रखते हैं। उनके बाद साधू सिंह राजपूत, जोगिन्द्र सिंह, महिन्द्र सिंह, हरपाल सिंह, बलदेव, राजबीर, विजय पाल और अब मौजूदा सरपंच कुलदीप राणा ने गांव के मुखिया के तौर पर अपनी बागडोरा संभाली हुई है। जो कि गांव में चहुंमुखी विकास करवा रहे हैं। गांव की तमाम गलियां, नालियां पक्की है तथा निकासी पानी का विशेष प्रबन्ध है।

    पेयजल आपूर्ति के लिए चार नलकूप लगे हैं:-

    ग्रामवासियों के लिए पेयजल आपूर्ति के लिए चार नलकूप लगे हुये हैं। जिनमें साफ सुथरा पानी लोगोंं के घरों में पहुंचता है। गांव पशु अस्पताल, समुदायिक केन्द्र भी है। जहां पर ग्रामीण अपने व अपने मवेशियों के लिए दवाई बुटि लेते हैं। गांव में चार आंगनवाडी केन्द्र भी बने हुये हैं। जहां अकसर जीरो से 5 साल तक के बच्चों को पढाई के साथ उन्हे पौष्टिक आहार भी दिया जाता है।

    गांव की फिरनी पर कर रखा है कब्जा:-

    गांव के कुछेक लोगों को कहना है कि गांव के ही कुछ लोगों ने गांव की फिरनी पर नाजायज कब्जा करके रास्ते को तंग कर रखा है। अगर फिरनी से अवैध कब्जे को हटवाया जाये तो रास्ता खुल जायेगा और लोगों को अपने ट्रैैक्टर ट्राली वगैराह व अन्य बडे वाहनों को ले जाने आने में दिक्कतों का सामना नही करना पडेगा।

    सभी ग्रामवासी प्रेम पूर्वक रहते हैं:-

    सभी ग्रामवासी बडे ही प्रेमपूर्वक रहते है। गांव में सबसे ज्यादां संख्या राजपूत जाति की है तथा पंडित, लोहार, जाट, जोगीनाथ, धोबी गडरियां बरैगी, बाल्मीकी, रमदासिया व कश्यप आदि जातियों का समावेश है। अधिकतर लोग खेतीबाडी व पशुपालन का काम करते हैं। गांव के 80 फीसदी युवा शिक्षित है ंबहुत से लोग आर्मी व अन्य सरकारी नौकरी में भी है हाल ही में एक युवक खादय एवं आपूर्ति विभाग में इंस्पैक्टर भी बना है। गांव के काफीे युवक विदेश भी जा चुके हैं। गांव के कुछेक लोग राजनीति में भी हैं।

    गांव में बना है वर्षो पुराना तालाब:-

    जब से गांव आबाद हुआ है तभी से गांव में एक बहुत बडा तालाब है इस तालाब में सभी ग्रामवासी अपने पशुओं को नहलाते व पानी पिलाते हैं। कभी कभार जरूरत पडने पर इस तालाब से खेतीबाडी के लिए भी पानी इस्तेमाल किया जाता है।

    अलग-अलग बनी है धर्मशालायें:-

    गांव में जहां सभी जातियों की अलग-अलग धर्मषालायें भी बनी हुई है। वहीं मिनी पैलेस, वृद्वा आश्रम, सीनीयर सकैंडरी स्कूल, तीन बैंक, डाकघर आदि की सुविधा भी है। बैक व डाकघर के जरिये गांव के बुजुर्गो को बुढापा पैंशन गांव में ही मिल जाती है। युवाओं के खेलने के लिए स्कूल में ग्राउंड भी है जहां अकसर युवक फुटवाल, बालीवाल खेलते हैं गांव के युवकों की खेलों में काफी रूचि है। गांव में कंई धार्मिक स्थल भी बने हुये है। जहां अकसर ग्रामीण आते जाते रहते हैं। Badhauli News

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