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    हरियाणा के इस जिले ने दिए कई राजनेता, समाजसुधारक, जज व खिलाड़ी….

    Pehowa
    Pehowa हरियाणा के इस जिले ने दिए कई राजनेता, समाजसुधारक, जज व खिलाड़ी....

    सच कहूँ/जसविंद्र सिंह पिहोवा। कुरुक्षेत्र जिला के पिहोवा उपमंडल का गांव गुमथलागढू अपने आप में प्राचीन इतिहास को समेटे हुए है। गढू पीर के नाम से उभरा गुमथलागढू गांव का नाम हरियाणा की राजनीति में अहम स्थान रखता है। पंजाब से अलग होकर हरियाणा बनने के बाद हुए पहले चुनाव में इस धरती पर खेले चिमनलाल सर्राफ विधायक बने थे। वहीं हरियाणा विधानसभा के चार बार सदस्य बने हरियाणा के कृषि मंत्री रहे जसविंद्र सिंह संधू इसी गांव की मिट्टी में बड़े होकर राजनीति में गए। इनके अलावा मौजूदा मुख्यमँत्री नायब सिंह सैनी के ओएसडी के पद पर तैनात भारत भूषण भारती भी इसी गांव में जन्में। भारत पाक के बंटवारे से पहले यह मुस्लिम समुदाय का गांव था। बंटवारे के समय यहां से गए राणा फूल मोहम्मद के बेटे राणा इकबाल मोहम्मद का पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा रोल रहा है। वे पाकिस्तान के पंजाब राज्य के 10 वर्ष तक विधानसभा स्पीकर रह चुके हैं व चार बार विधायक चुने गए। आज भी उनका गुमथलागढ़ू से जुड़ाव बना हुआ है।

    ऐसे में इस गांव से पनपी राजनीति हरियाणा ही नही पाकिस्तान में भी गुमथलागढू के नाम को पहचान दिला रही है। गांव की बहू अमनजोत कौर पत्नी जबरजंग सिंह विर्क इंटरनेशनल बॉक्सर रह चुकी हैं और तीन बार गोल्ड जीत चुकी हैं। जोकि अब कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रही है। गांव के कई बेटे व बेटियां पुलिस जैसी नौकरी में रहकर देश सेवा कर रहे हैं

    अंबाला-कैथल मार्ग पर स्थित पिहोवा का गांव गुमथलागढू प्राचीन गांव हैं, कई प्राचीन बिल्ड़िंग आज भी गांव की प्राचीनता को दर्शा रही हैं।

    हरियाणा विधानसभा में 1967 में पहुंचने वाले चिमन लाल सर्राफ व चार बार विधानसभा पहुंचने वाले जसविंद्र सिंह संधू इसी मिट्टी में खेले व सफलता के शिखर तक पहुंचे। इतना ही नहीं पाकिस्तान के पंजाब की विधानसभा में भी इसी गांव की मिट्टी जुड़े राणा इकबाल पहुंचे। गांव की बेटी नवनूर जज हैं, जिन पर पूरे गांव को नाज है। इसके अलावा इस गांव में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, बड़े राजनेता व खिलाड़ी पैदा हुए। गांव गुमथला गढू में प्रगति और परंपरा के संगम की झलक दिखाई पड़ती है।

    प्राचीनता को अपने में समेटे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं गांव

    कुरुक्षेत्र जिले के बड़े गांवों में शुमार कुरुक्षेत्र से 30 किलोमीटर दूर कैथल-चंडीगढ मार्ग पर स्थित गांव गुमथलागढू, जो प्राचीन भारत के इतिहास को अपने में समेटे हुए है। वहीं आधुनिकता की झलक भी इस गांव में खूब दिखाई देती है। गांव की प्राचीन मस्जिद आज भी भाईचारे की जीती जागती मिशाल है। भारत पाक के बंटवारे से पहले जिस मस्जिद मे मुस्लिम भाई बैठकर नमाज पढते थे। उसी मस्जिद में आज भी हिंदू भाई दीया जलाकर भाईचारे को कायम रखे हुए हैं। स्व. स. जसविंद्र सिंह संधू चार बार विधायक, एक बार मंत्री और तीन बार सरपंच रहे थे।

    महाभारत की यादों को समेटे है सोमतीर्थ

    गांव गुमथलागढू में स्थित सोमतीर्थ महाभारत की यादों को अपने में समेटे हुए है। सोमतीर्थ का उल्लेख महाभारत, पद्म पुराण और वामन पुराण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। मान्यता है कि सोमदेव ने यहीं कठोर तप कर राजयक्ष्मा रोग से मुक्ति पाई थी। तीर्थ के समीप प्रतिहार काल के भग्न मंदिर और मूर्तियां इसकी ऐतिहासिकता का प्रमाण हैं। जो इसे केवल श्रद्धा का स्थान नहीं, संस्कृति का प्रमाण-पत्र भी बनाते हैं। कोच अमनजोत कौर जो गांव के स्कूल में ही बच्चों को बॉक्सिंग की कोचिंग फ्री में देती हैकॉमनवेल्थ गेम माल्टा 2015/16 में गोल्ड मैडल वर्ल्ड ुनियस्टी टोक्यो में 2013/14 दो गोल्ड मैडल जीते है।

    आज का गुमथलागढ़ू

    गांव की मौजूदा सरपंच रवनीत कौर विर्क के अनुसार गांव में सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। गांव की जनसंख्या 8700 है जबकि साक्षरता दर 79 प्रतिशत है। गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती बाड़ी है जबकि काफी युवा विदेशों में हैं। वहीं अनेकों लोग सरकारी व गैर सरकारी नौकरियों में हैं। सरपंच के अनुसार गांव में दो प्राइमरी, एक मिडल और एक सीनियर सेकेंडरी तक का स्कूल हैं।

    समस्याएं भी हैं जिनसे ग्रामीण परेशान हैं

    ग्रामीण गुरप्रीत कंंबोज का कहना है कि गांव में पीने के पानी की समस्या व सीवरेज की समस्या है। तालाबों के रख रखरखाव की समस्या बहुत बड़ी है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बाहर से गुजरते हाईवे 152 पर बस स्टैंड जरूर है लेकिन बसों का ठहराव बहुत कम है। जिससे शहर में पढने जाने वाले बच्चों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।