
Business Idea: अनु सैनी सर्दियों के मौसम में मशरूम की खेती किसानों के लिए तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल कम लागत में अच्छी पैदावार देती है। खास बात यह है कि मशरूम की खेती के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी इससे अच्छी कमाई कर सकते हैं।
कम शेल्फ लाइफ बनती है किसानों की परेशानी
हालांकि, मशरूम की खेती लाभकारी है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या इसकी कम शेल्फ लाइफ है। ताजा मशरूम केवल 1 से 2 दिन ही सुरक्षित रह पाता है। ऐसे में अगर मंडी में अचानक आवक बढ़ जाती है, तो किसानों को मजबूरी में कम दाम पर अपनी फसल बेचनी पड़ती है। यही कारण है कि कई बार अच्छी पैदावार के बावजूद किसानों को अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पाता।
एक्सपर्ट की सलाह: प्रोसेसिंग से बढ़ेगी कमाई
इस समस्या का समाधान बताते हुए सर्वोदय किसान प्रोड्यूसर कंपनी के डायरेक्टर और प्रगतिशील किसान प्रेम शंकर गंगवार कहते हैं कि किसान यदि ताजा मशरूम को सीधे मंडी में बेचने के बजाय उसका प्रोसेसिंग उत्पाद तैयार करें, तो उनका मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है। प्रोसेसिंग के जरिए मशरूम की उम्र बढ़ाई जा सकती है और बाजार में बेहतर दाम भी मिलते हैं।
मशरूम पाउडर और आचार की बढ़ती मांग
प्रेम शंकर गंगवार के अनुसार, मशरूम से पाउडर और आचार जैसे उत्पाद तैयार कर किसान लंबे समय तक उसे सुरक्षित रख सकते हैं। जहां ताजा मशरूम 1–2 दिन में खराब हो जाता है, वहीं मशरूम पाउडर और आचार महीनों तक खराब नहीं होते। बाजार में इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर शहरों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर।
3 से 4 गुना तक मिल सकता है बेहतर दाम
प्रोसेस्ड मशरूम उत्पादों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके दाम ताजा मशरूम की तुलना में 3 से 4 गुना तक ज्यादा मिलते हैं। इससे किसान कम दाम में फसल बेचने की मजबूरी से बच जाते हैं और अपनी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त कर पाते हैं।
खेती से बिजनेस की ओर कदम
मशरूम की प्रोसेसिंग अपनाकर किसान केवल खेती तक सीमित नहीं रहते, बल्कि एक स्मार्ट एग्री-बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ते हैं। सही पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए किसान अपने उत्पाद को बड़े बाजार तक पहुंचा सकते हैं और स्थायी आय का जरिया बना सकते हैं।
किसानों के लिए सुनहरा अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान मशरूम की खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग को अपनाएं, तो यह खेती केवल मौसमी आमदनी का साधन नहीं, बल्कि लंबे समय तक मुनाफा देने वाला व्यवसाय बन सकती है। यह तरीका किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी मददगार साबित हो सकता है।














