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    38th Surajkund International Crafts Fair: टीकमगढ़ की मूर्तियां खींच रही पर्यटकों का ध्यान! सूरजकुंड मेले की बढ़ रही शान

    Surajkund Mela 2025 Updates
    38th Surajkund International Crafts Fair: टीकमगढ़ की मूर्तियां खींच रही पर्यटकों का ध्यान! सूरजकुंड मेले की बढ़ रही शान

    सागर दहिया/सच कहूँ
    38th Surajkund International Crafts Fair: फरीदाबाद। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में देश को नई पहचान दिला रहे सूरजकुंड शिल्प मेला में थीम स्टेट मध्य प्रदेश के शिल्पी भी किसी से पीछे नहीं रहना चाहते। इस बार थीम स्टेट के रूप में मेला की मेजबानी कर रहे मध्यप्रदेश के कलाकार अपनी कला एवं संस्कृति से यहां आने वाले हर पर्यटक का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। Surajkund Mela 2025 Updates

    मेले में मिल रही तमाम सुविधाओं के चलते शिल्पकार तहेदिल से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा का आभार प्रकट कर रहे हैं। काबिलेगौर है कि पर्यटन विभाग द्वारा 38 वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2025 का आयोजन गत 7 फरवरी से 23 फरवरी, 2025 तक किया जा रहा है। इस मेले में देश-विदेश के कलाकार और कारीगर ने अपनी कला और संस्कृति का सराहनीय प्रदर्शन कर पर्यटकों की खूब वाहवाही लूट रहे हैं। मेले में 42 देशों के 648 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

    टीकमगढ़ के कलाकार ने हाथों से बनाई है पीतल की मूर्तियां

    मेला परिसर में स्टॉल संख्या 173 के संचालक मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ निवासी पुष्पेंद्र कहते है यह स्टाल पीतल की मूर्तियों के शानदार संग्रह को प्रदर्शित करता है, जिसमें देवी-देवताओं, पशुओं और विभिन्न अन्य विषयों की मूर्तियाँ शामिल हैं। कलाकारों द्वारा हाथ से बनाई गई ये मूर्तियाँ, पारंपरिक तकनीकों और कारीगरी का प्रमाण हैं। यह अपनी अनूठी कलाकृतियों के लिए सरकार द्वारा राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित है। ये शानदार मूर्तियां हर किसी का ध्यान खींच रही है।

    मूर्ति बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल | Surajkund Mela 2025 Updates

    मूर्तिकार ने बताया पीतल कि मूर्ति बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। सबसे पहले वे मिट्टी, मोम या अन्य सामग्रियों से एक मॉडल तैयार करते हैं। फिर मॉडल को एक साँचे में ढाला जाता है। इस साँचे में पिघला हुआ पीतल डाला जाता है। पीतल ठंडा होने के बाद, उसे साँचे से निकाल दिया जाता है,फिर कलाकृति को सजावटी रूप देते हैं। सूरजकुंड मेले में आने वाले सभी कला प्रेमियों के लिए यह एक अद्भुत अवसर है, जहां वे पीतल की मूर्तियों की सुंदरता और कलात्मकता का अनुभव कर सकते हैं।

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