आंखों के रोगों से बचाती है योग की ‘त्राटक’ क्रिया

Tratak kriya

करनाल(सच कहूँ/विजय शर्मा)। आयुष विभाग के जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. ब्रह्म शर्मा ने बताया कि करनाल में 8वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस-2022 को सफलतापूर्वक मनाने के लिए योग प्रोटोकॉल के प्रशिक्षण के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जिला व ब्लॉक स्तर पर 3 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए हैं। इसी क्रम में बुधवार को योग प्रशिक्षण शिविर प्रात: 6:00 से 7:30 तक योग शेड फवारा पार्क सेक्टर-12 में आयोजित किया गया है। जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमती मेघा भंडारी पार्षद सेक्टर-6 करनाल तथा प्रसिद्ध समाजसेवी संकल्प भंडारी रहेक , जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉक्टर ब्रह्म शर्मा द्वारा इन्हें पुष्प बुके देकर स्वागत किया गया।

श्रीमती मेघा भंडारी ने योग प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए आयुष विभाग एवं विभिन्न योग समितियों की खूब सराहना की। डॉ. अमित पुंज द्वारा अंतिम दिन 255 अधिकारियों, कर्मचारियों तथा जनप्रतिनिधियों को योग अभ्यास करवाया। जिसमें योग समिति से सुरेंद्र नारंग, श्रीमती सुशीला गोयल, मेरा मिशन स्वस्थ भारत से दिनेश गुलाटी, श्रीमती नीलम का सहयोग मुख्य रूप से रहा।

त्राटक क्रिया, ध्यान साधना की एक विधि: डॉ. अमित पुंज

डॉ. अमित पुंज ने त्राटक क्रिया के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि त्राटक शब्द की उत्पत्ति ‘त्रा’ से ॅॅहुई है, जिसका अर्थ है मुक्त करना। त्राटक क्रिया, ध्यान साधना की एक विधि है। त्राटक किसी वस्तु पर अपनी आँखों से लगातार टक-टकी लगाकर देखना। यह हठ योग का प्रमुख भाग है जिसमें अंतर्दृष्टि को जागृत किया जाता है। त्राटक, नेती, धौति, कपालभाति, बस्ती एवं नौली, छ: षट्कर्म क्रियाएं हैं। जिन्हें करने से शरीर स्वास्थ्य एवं अध्यात्मिक विकास के लिए किया जाता है। यह क्रिया आँखों को साफ करने एवमं नेत्रों की रोशनी बढ़ाने के लिए की जाती है।

आइये जानते हैं त्राटक क्रिया करने की सही विधि

  • अकेले एक शांत कमरे में ध्यान की सहज मुद्रा में बैठ जाएं।
  • अपने शरीर को ढीला एवं रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
  • किसी स्पष्ट दिखने वाली वस्तु, मोमबत्ती या मिट्टी के दिये की लो को आखों की ऊँचाई पर रखें। -ध्यान रहे, वस्तु की आखों से दूरी लगभग अढ़ाई-फुट होनी चाहिए।
  • तत्पश्चात उस वस्तु पर अपना सम्पूर्ण ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें।
  • मन के सभी विचारों को सरलता से निकल जाने दें।
  • वस्तु को तब लगातार बिना पलक झपके देते रहें जब तक आंखें थक ना जाए।
  • लंबी सांस लें, आंखें बंद कर लें और वस्तु की छवि को मस्तिष्क में अंकित करने का प्रयत्न करें।
  • यह आपके तीसरे नेत्र को जागृत करने के लिए आवश्यक है।

त्राटक क्रिया के लाभ

  • त्राटक क्रिया आँखों के लिए लाभदायक।
  • आपकी एकाग्रता को बढ़ाने में सहायक।
  • नियमित अभ्यास आंखों के रोगों को दूर करने में सहायक।
  • यह मस्तिष्क के विकास में लाभकारी होती है।
  • यह स्मृति एवं एकाग्रता बढ़ाती है।
  • इसके अभ्यास से अल्फा तरंगें बढ़ती हैं, जो मस्तिष्क के विश्रामावस्था में होने का संकेत हैं।

त्राटक साधना में रखें ये सावधानियां –

  • इस साधना के समय आपके आसपास शांति हो।
  • साधना का सबसे अच्छा समय है ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 3 से 5 के बीच।
  • प्रतिदिन लगभग एक निश्चित समय पर 15—30 मिनट तक करना चाहिए।
  • स्थान शांत एकांत ही रहना चाहिए। साधना करते समय किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आए।
  • शारीरिक शुद्धि व स्वच्छ ढीले कपड़े पहनकर किसी आसन पर बैठ जाइए।
  • त्राटक क्रिया अभ्यास किसी योग्य योग विशेषज्ञ के निर्देशन में की जानी चाहिए।
  • ज्योति स्थिर होनी चाहिए और उसे फड़फड़ाना नहीं चाहिए।
  • आँखों में किसी भी प्रकार का दर्द या जलन हो तो इस क्रिया को न करें।

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