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Thursday, March 26, 2026
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    Sirsa Weather: बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि व आंधी से किसानों में हड़कंप!

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    Sirsa Weather: बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि व आंधी से किसानों में हड़कंप!

    मंडियों व खरीद केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे पड़ा गेहूं भीगा

    नाथूसरी चोपटा, भगत सिंह। चोपटा क्षेत्र में बेमौसमी आंधी, बारिश व ओलावृष्टि से जहां एक और खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान हुआ। वहीं कागदाना, नाथूसरी चौपटा, कुत्तियाना व शक्कर मंदोरी की मंडियों व खरीद केंद्रों पर हजारों क्विंटल खुले आसमान के नीचे पड़ा गेहूं बारिश में भीग गया। नाथूसरी चोपटा अनाज मंडी में अब तक 22000 क्विंटल गेहूं की आवक हुई है और उठान अभी शुरू नहीं हुआ है। खुले आसमान के नीचे पड़ा गेहूं पूरी तरह से भी गया है। Sirsa Weather

    आढतियों द्वारा ना तो तिरपाल की व्यवस्था की गई और ना ही वुडन कैरेट की व्यवस्था की गई। जमीन पर गेहूं पानी में तैरने लगा। मार्केट कमेटी अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मंडियों व खरीद केंद्रों में किसान की गेहूं लाने के बाद गेहूं को बचाने की जिम्मेदारी आढ़तियों की होती है। आढ़तियों को ही तिरपाल और कैरेट की व्यवस्था करनी होती है। लेकिन क्षेत्र में कहीं भी ऐसी व्यवस्था नजर नहीं आ रही। जिससे कि गेहूं खराब होने लगी है अभी भी आसमान साफ नहीं हुआ है। धीमा उठान और आढ़तियों की लापरवाही से खाद्यान्न को काफी नुकसान हो रहा है। Weather Update

    बारिश होने से गेहूं को भीगने से नहीं बचाया जा सका | Sirsa Weather

    नाथूसरी चौपटा अनाज मंडी, कागदाना खरीद केंद्र में भी गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है और बारिश होने से गेहूं को भीगने से नहीं बचाया जा सका है। कुत्तियाना खरीद केंद्र में भी गेहूं खुले आसमान के नीचे बारिश में भीग गया। उधर कुम्हारिया, कागदाना, गिगोरानी, रामपुरा ढिल्लों , जमाल , कुतियाना, रुपावास, नाथूसरी कलां, जोड़किया, खेड़ी, गुसाईं आना सहित कई गांवों में शुक्रवार दोपहर को आई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में गेहूं और तूड़ी को नुकसान हुआ है। पशुओं के लिए चारे की कमी होने का संकट भी गहरा सकता है। Farmers News

    नाथूसरी चोपटा अनाज मंडी में अभी तक 22000 क्विंटल गेहूं की आवक हुई है और उठान शुरू नहीं हुआ है, वहीं सरसों की भी 6000 क्विंटल आवक हुई है। बारिश से गेहूं भीगा है। किसान का गेहूं मंडी में पहुंचने के बाद उसको बचाने की जिम्मेदारी आढ़तियों की होती है। यह लाइसेंस देते समय तय किया जाता है कि बारिश से बचाने के लिए तिरपाल व वुडन कैरेट का प्रबंध आढ़तियों को ही करना होगा। अगर ज्यादा बारिश होती है तो यह व्यवस्था लागू करवाई जाएगी।
    प्रमोद कुमार ओक्शन रिकॉर्डर  Sirsa Weather

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