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    आवारा कुत्तों का बेहतर प्रबंधन करने वाले शहरी निकायों को मिलेगा ईनाम

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    Lucknow आवारा कुत्तों का बेहतर प्रबंधन करने वाले शहरी निकायों को मिलेगा ईनाम

    लखनऊ (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश सरकार आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और भोजन कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन करने वाले शहरी स्थानीय निकायों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को पुरस्कृत करेगी। अधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि सरकार ने कुत्तों के जीवन के स्थानीय पहलू को ध्यान में रखते हुए “उपयुक्त भोजन स्थलों” की पहचान करने और उन्हें चिह्नित करने के निर्देश दिये हैं। अधिकारियों ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के 22 अगस्त के आदेश के अनुरूप राज्य के व्यापक निर्णय के तहत 4 सितंबर को जारी इस कदम का उद्देश्य पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम के प्रभावी और वैज्ञानिक कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है, साथ ही जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देना भी है।

    दरअसल राज्य सरकार के इस आदेश का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नगरपालिका वार्ड में आवारा कुत्तों के लिए सुरक्षित और जिÞम्मेदार भोजन स्थलों का निर्धारण करना है। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि कुत्तों को उनके क्षेत्र में ही भोजन दिया जाए ताकि संघर्ष कम हो, सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा हो और सहानुभूतिपूर्ण देखभाल को बढ़ावा मिले।

    राज्य सरकार के आदेश में कहा गया है, “नसबंदी, टीकाकरण और आहार प्रबंधन में अच्छे परिणाम प्राप्त करने वाले शहरी स्थानीय निकायों और संगठनों को राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत किया जाएगा।” इस आदेश का उद्देश्य सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना, करुणामयी देखभाल को बढ़ावा देना, जन सुरक्षा सुनिश्चित करना और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना है।

    उत्तर प्रदेश पशु जन्म नियंत्रण निगरानी समिति की सदस्य गौरी मौलेखी ने कहा, “करुणा और दया की भावना शासन का एक स्तंभ और राष्ट्र की विरासत है। वैज्ञानिक और विचारशील नीतियों के माध्यम से लोगों और पशुओं, दोनों की रक्षा करके, उत्तर प्रदेश यह दशार्ता है कि प्रगति केवल बुनियादी ढाँचे और आँकड़ों से नहीं, बल्कि उस सम्मान से मापी जाती है जिसके साथ हम अपने बीच सबसे कमजोर लोगों के साथ व्यवहार करते हैं।” राज्य सरकार आदेश में कहा गया है, “ऐसे स्थानों का चयन करते समय यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि कुत्ते स्वभाव से ही क्षेत्रीय होते हैं। उन्हें अपने क्षेत्र से बाहर जाने के लिए मजबूर करने से संघर्ष होता है।”