हमसे जुड़े

Follow us

12.2 C
Chandigarh
Thursday, February 5, 2026
More

    US Senator Warns: भारत-चीन को लेकर अमेरिकी सीनेटर की चेतावनी, जानें वजह?

    US News
    US Senator Warns: भारत-चीन को लेकर अमेरिकी सीनेटर की चेतावनी, जानें वजह?

    US Senator Warns: वाशिंगटन। अमेरिका के एक वरिष्ठ सीनेटर ने भारत, चीन सहित अन्य देशों में निर्मित जेनेरिक दवाओं पर बढ़ती निर्भरता को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। सीनेट की विशेष समिति ऑन एजिंग के अध्यक्ष सीनेटर रिक स्कॉट का कहना है कि विदेशी स्रोतों से आने वाली सस्ती दवाओं पर अत्यधिक आश्रय अमेरिकी नागरिकों की सेहत और देश की सुरक्षा—दोनों के लिए जोखिम बन सकता है। US News

    बुधवार को (स्थानीय समयानुसार) दिए गए वक्तव्य में स्कॉट ने बताया कि अमेरिका में उपयोग होने वाली अधिकांश जेनेरिक दवाएं और उनके कच्चे रासायनिक घटक विदेशों में तैयार किए जाते हैं। उनके अनुसार, यह व्यवस्था केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के लिए भी चिंताजनक है।

    सीनेटर स्कॉट ने कहा कि जिन अमेरिकियों की सेहत इन दवाओं पर निर्भर है, उन्हें यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनकी दवाओं में कौन-कौन से घटक शामिल हैं और वे कहां तैयार हुए हैं। इसी उद्देश्य से उनकी समिति दवा आपूर्ति प्रणाली में मौजूद कमियों को उजागर करने के लिए फिर सक्रिय हुई है। इस प्रयास में वे समिति की वरिष्ठ सदस्य सीनेटर किर्स्टन गिलिब्रैंड के साथ मिलकर जांच, सुनवाई और सरकारी एजेंसियों तथा उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद कर रहे हैं।

    स्कॉट के अनुसार, अमेरिका में उपयोग होने वाली जेनेरिक दवाओं के लगभग 80 प्रतिशत सक्रिय औषधीय घटक (एपीआई) विदेशों से आते हैं। कई मामलों में ये दवाएं ऐसे संयंत्रों में बनती हैं जहां निगरानी सीमित होती है और स्वच्छता मानकों पर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि इससे गंभीर स्वास्थ्य हानि की आशंका बढ़ जाती है, साथ ही विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता एक रणनीतिक कमजोरी भी है। US News

    चीन कभी भी दवाओं की आपूर्ति बाधित कर सकता है

    उन्होंने चेताया कि चीन कभी भी दवाओं की आपूर्ति बाधित कर सकता है, जिससे बुजुर्गों, सैन्य कर्मियों और आम नागरिकों को आवश्यक औषधियां समय पर न मिल सकें। स्कॉट ने यह भी कहा कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) देश के भीतर स्थित दवा इकाइयों का निरीक्षण कहीं अधिक करता है, जबकि विदेशों में मौजूद कारखानों की जांच अपेक्षाकृत कम होती है। कई बार आपूर्ति बनाए रखने के लिए नियम उल्लंघन पर भी ढील दी जाती है।

    समिति की एक हालिया जांच में सामने आया कि अमेरिका में दवाओं का घरेलू उत्पादन तेज़ी से घटा है। वर्ष 2024 में देश अपनी कुल दवा आवश्यकता का केवल 37 प्रतिशत ही स्वयं तैयार कर पाया, जबकि 2002 में यह अनुपात 83 प्रतिशत था। रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश आइबुप्रोफेन, बड़ी मात्रा में पैरासिटामोल और पेनिसिलिन का अहम हिस्सा चीन से आता है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर एंटीबायोटिक दवाओं में प्रयुक्त अधिकांश एपीआई का उत्पादन भी चीन में होता है। US News

    भारत भी इस वैश्विक आपूर्ति शृंखला का एक महत्वपूर्ण केंद्र है

    भारत भी इस वैश्विक आपूर्ति शृंखला का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। अमेरिका में खपत होने वाली लगभग आधी जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं, हालांकि भारतीय दवा उद्योग भी अपने कच्चे माल के बड़े हिस्से के लिए चीन पर निर्भर है। समिति ने 2025 के एक अध्ययन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में बनी कुछ जेनेरिक दवाओं से जुड़े गंभीर दुष्प्रभाव, अमेरिका में निर्मित समान दवाओं की तुलना में अधिक पाए गए हैं, जिनमें स्थायी अपंगता या मृत्यु तक का जोखिम शामिल है।

    सीनेटर स्कॉट का कहना है कि अमेरिकियों को अपनी दवाओं की सुरक्षा और उपलब्धता को लेकर जोखिम उठाने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा बहाल करने के लिए त्वरित सुधारों की मांग की। समिति की रिपोर्ट में आवश्यक दवाओं के लिए घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देने, आपूर्ति शृंखला की विस्तृत मैपिंग, दवाओं के मूल देश की जानकारी अनिवार्य करने, व्यापारिक जांच प्रावधानों के उपयोग, ‘मेड इन अमेरिका’ लेबल के दुरुपयोग पर रोक और अमेरिकी जैव-प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देने जैसे कई सुझाव शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि भारत और चीन आज भी वैश्विक जेनेरिक दवा उद्योग के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं और अमेरिका सहित दुनिया भर में किफायती दवाओं की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। US News