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    चार साहिबजादों की जीवनी पर आधारित प्रदर्शनी रही आकर्षण का केन्द्र

    Veer Bal Diwas

    माता गुजर कौर और चार साहिबजादों की शहादत को समर्पित शहीदी दिहाड़े का आयोजन

    हनुमानगढ़। गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की माता गुजर कौर और चार साहिबजादों की शहादत को समर्पित शहीदी दिहाड़े का आयोजन सोमवार को टाउन की धानमंडी के पास स्थित दशहरा ग्राउंड में किया गया। सर्वसमाज की ओर से पहली बार क्षेत्र में आयोजित किए गए शहीदी दिहाड़े पर सिख संगत सहित सर्व समाज के नागरिकों ने पहुंचकर गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष शीश नवाया। कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई तरन तारन से आई चार साहिबजादों की जीवनी पर आधारित प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र रही।

    प्रदर्शनी के जरिए सरहिंद के नवाब वजीर खां की ओर से गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों और माता गुजर कौर को दी गई यातनाओं का दृश्य प्रस्तुत किया गया। यह दृश्य देखकर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद हर व्यक्ति की आंख नम हो गई। पूरा परिसर जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक गुरप्रीत सिंह व दरबार साहिब से हैड ग्रंथी जसविन्द्र सिंह, दमदमा साहिब से जगतार सिंह व ढाडी जत्था तरसेम सिंह ने सिख इतिहास की जानकारी दी।

    माता गुजर कौर और चार साहिबजादों की शहादत को समर्पित शहीदी दिहाड़े का आयोजन

    उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म की रक्षा का जिम्मा अपने हाथ में लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिब जादों ने सरहिंद के नवाब वजीर खां के आगे अपना सर नहीं झुकाया। अपने आप को इस देश पर कुर्बान कर दिया। गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिब जादे जिसमें दो बड़े साहिबजादे बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह और दो छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह व बाबा फतेह सिंह ने नवाब की ओर से दी गई सभी पीड़ाओं और तकलीफों को हंसकर सह लिया, लेकिन उसके आगे अपनी गर्दन नहीं झुकाई। साहिबजादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह ने अपनी शहादत दे दी, लेकिन धर्म पर आंच नहीं आने दी। उन्होंने गुरुवाणी की पंक्ति ‘सूरा सो पहचानिए, जो लरै दीन के हेत, पुरजा पुरजा कट मरै, कबहू ना छांड़े खेतझ् को सच किया।

    जोरावर सिंह और फतेह सिंह को इस्लाम कबूल नहीं करने की वजह से जिंदा दीवार में चुनवा दिया। उनकी दादी गुजर कौर को किले के ऊंचे बुर्ज से धक्का देकर शहीद कर दिया। इस तरह देश और धर्म की रक्षा में गुरु गोबिंद सिंह महाराज का सारा परिवार शहीद कर दिया गया। दशम गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की शहादत इतिहास का ऐसा सुनहरा पन्ना है, जिसका उदाहरण बिरला ही मिलता है। धर्म की रक्षा के लिए गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इस कारण उन्हें सरबंस दानी भी कहा गया। इस मौके पर नगर परिषद सभापति गणेश राज बंसल, उपसभापति अनिल खीचड़, पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप सहित अन्य जनप्रतिनिधियों व गणमान्य नागरिकों ने भी गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष शीश नवाया और प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस आयोजन में टाउन के प्रेमनगर स्थित गुरुद्वारा गुरुनानक सर प्रबंधक कमेटी के प्रधान बलकरण सिंह, कमलजीत सिंह, जितेन्द्रसिंह सहित अन्य सेवादारों ने सेवाएं दी।

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