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    तेरी आवाज ही पहचान है….

    Lata Mangeshkar

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। मेरी आवाज ही पहचान है- फिल्म ‘किनारा’ के लिए भूपेंद्र के साथ गाए इस गीत के साथ लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए फिल्म निमार्ता बॉबी बेदी ने कहा,‘संगीत प्रमियों के साथ लताजी का रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा, वह अपने संगीत के साथ करोड़ों लोगों के दिल से जुड़ी रहेगी। बॉबी बेदी ने कहा, ‘मृत्यु असंभावी है। हर किसी को एक न एक दिन जाना ही होता है । संयोग से आज ऐसी प्राद्योगोगिकी आ गयी है जिससे उनकी आवाज हमारे बीच बनी रहेगी, हमें प्ररित करेगी, हमें भावुक बनाएगी, हमें शांति देगी।

    उन्होंने लताजी की संगीत-साधना, उनके योगदान, उनके व्यक्तित्व और कृतीत्व पर पर कहा,‘फिल्म उद्योग में गिने चुने लोग ही होते हैं। इंडस्ट्री के लोगों के साथ लताजी काम-काज का संबंध रहा होगा, पर उनका स्वर उन्हें करोड़ों के दिल के साथ जोड़ता है। यह स्वाभाविक है, क्यों कि संगीत हमरे जीवन के हर मौके, हर मूड में हमारे साथ होता है। खुशी हो या गम – हर मौके पर हम संगीत को लताशते हैं, उसे अपने मनो- भाव से जोड़ते और प्रेरित होते है।

    उन्होंने कहा,‘लताजी बहुत अनुशासित थीं। वह शास्त्रीय संगीत की तरफ ही बनी रहीं। वह ‘बहुत ज्यादा पापुलर जोन’ में नहीं गयीं। यह उनकी च्वायस थी , उनका निर्णय था। उनके संगीत निर्देशकों ने भी उनको लेकर वही चीज तय की। उन्होंने कहा,‘लता मंगेशकर ने चार साल की उम्र में संगीत सीखना शुरू किया। उन्होंने साधना शुरू की पर साधना के साथ साथ नैसर्गिक प्रतिभा से बड़ा फर्क पड़ता है। उन्होंने अपनी गायकी के लिए अपने शरीर को भी साधे रखा। लताजी का गायकी-जीवन जितना लंबा रहा वह बिरला है। किसी गायक के लिए छह सात दशक तक अपने लंग (फेपड़े) को ताकतवर बनाए रखना, अपनी सांस को को लम्बा रखने का दम-खम बरकार रखना कोई साधारण बात नहीं है।

    वह किसी को कॉपी नहीं करती थीं

    बेदी ने कहा, ‘वह किसी को कॉपी नहीं करती थीं। पर उनमें अपनी पर्श्वगायकी में उस कलाकार को दे कर अपनी आवाज के माड्युलेशन, उसको उसके अनुकूल स्वरूप देने की अद्भुत क्षमता थी। उनकी आवाज हल कला कार पर फिट हो जाती थी । इसके विपरीत किशोर कुमार जैसे गायक पहले अपने लिए गाया करते थे फिर उन्होंने देवानंद के लिए गाना शुरू किया उसके बाद राजेश खन्ना के लिए गाया।

    बकौल बॉबी बेदी लताजी की यश चोपड़ा से बहुत पटती थी। यश चोपड़ा ने ही बेदी को एक बार बताया था कि लता का संगीत के प्रति बड़ा स्ट्रांग, बड़ा कड़ा विचार होता था। वह अपना काम अपनी पसंद के हिसाब से करती थीं। वह सफलता और प्रसिद्धि की जिन ऊंचाइयों पर पहुंच चुकी थी उसमें पैसे का कोई मायने नहीं रहता। कोई लालच नहीं रह जाती है। उन्होंने संगीत की दुनिया और इस देश के लिए बहुत कुछ किया।

    बॉबी बेदी ने कहा,‘उन्होंने हर हर तरह के गीत गाएं, विभिन्न भाषाओं में गाए। भक्ति के गीतों का गायन किया। उनकी प्रतिभा निराली थी। वह भावना के साथ गाती थी। उन्होंने गुरुवाणी का जो स्वर दिया है वह सुनते बनता है। उन्होंने नए गायकों को भी प्रोत्साहित किया पर अपने जमाने में उनका राज चलता था। उस समय गिनती के पर्श्वगायक हुआ करते थे जिनका नाम था। बकौल बेदी आज संगीत मकैनिकल (यांत्रिक) हो चुका है। नयी पीढ़ी अलग तरह का संगीत सुनना चाहती है। पर लताजी की आवाज ने करोड़ों लोगों के दिलो के साथ भावनाओं का जो रिश्ता कायम किया है वह कहीं नहीं जाएगा।

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