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    हम किसी भी धर्म की निंदा, बुराई या बेअदबी तो दूर इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते : पूज्य गुरु जी

    Anmol Vachan

    पूज्य गुरू जी ने शाही पत्र में यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के विराम और शांति के लिए भी करवाई अरदास

    • रोहतक में होगा सफाई महाअभियान

    सरसा। डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत में रविवार को भारी उत्साह देखने को मिला। अवसर था शाह सतनाम जी धाम, सरसा में हुई नामचर्चा का। इस अवसर पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने पत्र भी भेजा, जिसे साध-संगत के बीच पढ़कर सुनाया गया। पूज्य गुरु जी के रूहानी पत्र को सुनकर साध-संगत भाव-विभोर हो उठी। रूहानी पत्र में पूज्य गुरु जी ने लिखा कि हमने कभी भी किसी भी धर्म की निंदा, बेअदबी या बुराई करनी तो दूर ऐसी कभी कल्पना भी नहीं की बल्कि हम तो खुद सर्वधर्म का ‘सत्कार’ करते हैं व सबको ‘सत्कार’ करने की शिक्षा देते हैं। इसके साथ ही पूज्य गुरु जी ने रूस व यूक्रेन के बीच चल रहे ‘युद्ध’ के जल्दी खत्म होने और विश्व में शांति स्थापना की प्रार्थना की और साध-संगत से भी ऐसा करने का आह्वान किया।

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    पूज्य गुरू जी का आया 9वां शाही पत्र

    पत्र में पूज्य गुरु जी ने लिखा कि अप्रैल में डेरा सच्चा सौदा के ‘स्थापना दिवस’ का भंडारा मनाया जाता है। हमें पता चला है कि साध-संगत अप्रैल में रोहतक में भी ‘सफाई महा अभियान’ करना चाहती है। इसलिए डेरा सच्चा सौदा के चेयरपर्सन डॉ. पी.आर. नैन इन्सां व जिम्मेवार प्रशासनिक अनुमति लेकर यह सेवा कर लें। वहीं पूज्य गुरु जी ने छह मार्च को साध-संगत द्वारा गुरुग्राम में चलाए गए सफाई महा अभियान की प्रशंसा करते हुए लिखा कि हमारे ‘गुरुग्राम’ से आने के बाद आपने ‘गुरूग्राम’ में ‘सफाई महा अभियान’ चला कर श्रद्धा की बेमिसाल ‘मिसाल’ कायम की है, आपका सतगुरु से प्यार व यकीन चौगुना बढ़े व आप सबकी झोलियां, सतगुरु जी, खुशी व बरकतों से लबालब भर दें।

    पूज्य गुरु जी ने पत्र में लिखा कि साध-संगत हमेशा बढ़-चढ़कर आश्रम में आती रहे। हम आपके गुरू थे, हैं व हमेशा गुरु रूप में वचन देते हैं कि जितनी बार आप आश्रम में आएंगे, हर बार आगे से चौगुणी खुशियाँ व बरकतें हम परम पिता सतगुरु जी से दिलवाएंगे। पत्र के माध्यम से साध-संगत को सचेत करते हुए पूज्य गुरु जी ने लिखा कि हमारे सारे सेवादार व एडम ब्लॉक सेवादार, जसमीत, चरणप्रीत, हनीप्रीत, अमरप्रीत सब एक हैं व हमारी बातों पर (वचनों पर) चलते हैं। चारों हमें रोहतक इकट्ठे छोड़ने आए व वापिस भी चारों इकट्ठे गए। जसमीत, चरणप्रीत व अमरप्रीत ने हमसे आज्ञा ली है कि ‘उच्च शिक्षा’ प्राप्ति के लिए वो अपने बच्चों के साथ उन्हें पढ़Þाने जाएंगे। इसलिए प्यारी साध-संगत जी आपने किसी के भी बहकावे में नहीं आना है। इस दौरान करोड़ों की संख्या में साध-संगत ने अपने-अपने घरों में भी इस आॅनलाइन नामचर्चा का लाभ उठाया।

    इससे पूर्व पवित्र नारा ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ के साथ नामचर्चा का आगाज हुआ। तत्पश्चात कविराजों ने विभिन्न भक्तिमय भजनों ‘सतगुरु बख्श दो तुसी बख्शणहार’, ‘आपकी इनायतें सतगुरु कैसे गिनाएंगे’, ‘है दु:ख-सुख आए जो भी हो, नहीं घबराते प्रेमी तो’, ‘हमको सतगुरु प्यार दिया है इतना, कैसे बताएं कितना’, ‘जो नजर आए सब है सपना, क्यों झूठे जग से प्यार किया’ और ‘हाल क्या है जी कलयुग में जीवों का, समझे वो ही प्राणी जो सत्संग आ गया’ आदि के माध्यम से सतगुरु जी की महिमा का गुणगान किया। इस अवसर पर बड़ी-बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से पूज्य गुरु जी के अनमोल वचन चलाए गए। नामचर्चा के बाद लंगर-भोजन वितरित किया गया है।

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