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Wednesday, February 18, 2026
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    Haryana-Punjab Weather: हरियाणा-पंजाब में अगले 4 दिनों में मौसम में होगा बदलाव, मौसम विभाग ने की भविष्यवाणी

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    Haryana-Punjab Weather: हरियाणा-पंजाब में अगले 4 दिनों में मौसम में होगा बदलाव, मौसम विभाग ने की भविष्यवाणी

    Haryana-Punjab Weather: हिसार। उत्तर भारत से मानसून विदाई ले चुका है और इसके साथ ही हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। भारत मौसम विभाग और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार आगामी दिनों में मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ी राज्यों तक शुष्क वातावरण बना रहेगा। भारतीय मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि अगले चार दिनों तक हरियाणा और पंजाब में बारिश की कोई संभावना नहीं है। वहीं हिमाचल प्रदेश में भी पांच दिनों तक मौसम साफ और शुष्क रहेगा। इस दौरान पूरा उत्तर भारत बारिश से मुक्त रहेगा, जबकि पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में छिटपुट वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है। चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि हरियाणा में मानसून की वापसी हो चुकी है। राजस्थान के ऊपर बने एंटीसाइक्लोनिक सकुर्लेशन के कारण उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएं बह रही हैं। इनके असर से राज्य में 29 सितंबर तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील लेकिन शुष्क रहने की उम्मीद है।

    मौसम बदलाव का प्रभाव | Haryana-Punjab Weather

    डॉ. खीचड़ ने बताया कि इस अवधि में दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है जिससे दिन के समय मौसम चटख धूप वाला होगा और बीच-बीच में हल्के बादल भी छा सकते हैं। वहीं रात के तापमान में गिरावट का असर दिखेगा। इसका सीधा असर लोगों को दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंडक के रूप में महसूस होगा।

    हिमाचल में भी खुश्की का असर

    मैदानी राज्यों के साथ ही हिमाचल प्रदेश में भी आने वाले दिनों में बारिश की संभावना नहीं है और वहां मौसम शुष्क बना रहेगा। इससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को साफ मौसम का लाभ मिलेगा लेकिन किसानों को अब खेतों में सिंचाई पर ध्यान देना पड़ेगा।

    फसलों पर असर

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश न होने से खरीफ फसलों की कटाई का काम सुगमता से हो सकेगा। हालांकि, तापमान में बदलाव के कारण किसानों को सब्जियों और अन्य संवेदनशील फसलों पर नजर रखनी होगी। सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बरतनी होगी ताकि मिट्टी में नमी का संतुलन बनाए रखा जा सके।