हमसे जुड़े

Follow us

17.9 C
Chandigarh
Wednesday, February 18, 2026
More
    Home विचार नई स्फूर्ति औ...

    नई स्फूर्ति और नए संकल्प के साथ नए साल का स्वागत

    Welcome new year with new charm and new resolution

    राजस्थान, मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में कांग्रेस की वापसी के साथ वर्ष 2018 की विदाई और लोकसभा के चुनावों की आहट के साथ 2019 का स्वागत किया जा रहा है। 2018 का साल एक तरह से कांग्रेस की सत्ता वापसी का साल कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं कहा जा सकता। साल की पहली छमाही में जहां कर्नाटका के चुनावों में भाजपा को सत्ता की सीढ़ी चढ़ने से कांग्रेस कामयाब रहीं वहीं साल के अंत में हुए पांच राज्यों के चुनावों में तीन प्रमुख राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में भाजपा से सत्ता छिनने में कांग्रेस कामयाब रही।

    देखा जाए तो यह साल राहुल गांधी की परिपक्वता और राहुल के कद में बढ़ोतरी के रुप में देखा जा सकता है। दरअसल जीएसटी और आरक्षण का मुद्दा इस साल की बड़ी घटनाओं में से एक है और इसका सीधा सीधा असर भी चुनाव परिणामों से साफतोर से देखा जा सकता है। आरबीआई के गवर्नर का इस्तिफा कोढ़ में खाज का काम कर गया वहीं राफेल का मुद्दा भी राजनीतिक गलियारों व यहां तक कि कोर्ट तक में छाया रहा। सीबीआई का झगड़ा सड़क पर आना भी इस साल की बड़ी घटना में से एक रहा है। कारोबारी सुगमता के क्षेत्र में 30 पायदान की लंबी छंलाग निश्चित रुप से वैश्वित स्तर पर गौरव की बात रही है। इसरो के लिए यह साल उपलब्धियों भरा रहा हैं वहीं तीन तलाक का मुद्दा साल की शुरूआत से लेकर साल के अंत तक छाया रहा है। निश्चित रुप से कश्मिर की स्थितियों में सुधार देखा जा रहा हैं वहीं आतंकवादी गतिविधियों पर भी अंकुश लगा है। सबसे मजे की बात यहै है कि साल के अंत में हुए चुनावों में ईबीएम की विश्वसनियता कोई खास मुद्दा बनकर नहीं उभरी बल्कि चुनाव आयोग और अधिक निखार के साथ सामने आया है।

    31 दिसंबर की रात 12 बजे हैप्पी न्यू ईयर की घोष के साथ 2019 का आगाज हो रहा है। बेहद उथल-पुथल भरे 2018 की कड़बी मीठी यादों को भुलाकर नए साल में नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। बीती ताही बिसार दे, आगे की सुध लेय के साथ नए साल का स्वागत करना है। परिवार, समाज, प्रदेश, देश और विश्व में सुख और शांति की कामना लेकर आगे बढ़ने की सोच बनानी होगी। असल में साल 2018 में जो कुछ उपलब्धियां या कटुताएं रहीं उसे भुलाते हुए अब नए संकल्प के साथ 2019 में प्रवेश करना है। राजनीतिक दृष्टि से देखे तो यह साल बीजेपी के सत्ता रथ के रुकने का रहा है। वहीं कांग्रेस के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में सत्ता की वापसी का रहा है। यह निश्चित रुप से कांग्रेस की बडी जीत है क्यों कि इन पांच राज्यों के चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल माना जाता रहा है। राहुल गांधी की परिपक्वता और कांग्रेस अध्यक्ष की अगुवाई में विजय श्री इस साल की कांग्रेस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।

    हांलाकि भाजपा मुक्त भारत की कल्पना अभी दूर दिखाई दे रही हैं क्यों कि विपक्षी दलों द्वारा एक साथ मिलकर चुनाव लड़ता अभी दूर की कोड़ी दिखाई दे रही है। राममंदिर का मसला अवश 2019 का प्रमुख मसाल बनकर उभरने की संभावना है। इलाहाबाद का कुंभ अवश्य इस साल का बड़ा आयोजन होगा। तकनीक के क्षेत्र में देश ने नई उंचाइयां प्राप्त की यहां तक कि उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण कर भारतीय तकनीक का लोहा मनवा दिया। विदेशों में भारत की साख बढ़ी है इससे कोई इंकार नहीं कर सकता। रात के बाद सुबह की सूर्य किरणों की आस की तरह नए साल के साथ एक उज्ज्वल पक्ष भी आता है। हम नए साल के साथ सोचने को मजबूर होते हैं गए साल की कमियों को दूर करने की, कुछ नया करने की। समाज में नया और अच्छा करने की। समाज की बुराइयों को दूर करने की। समाज को विकास की राह पर आगे तक ले जाने की। जो कुछ खोया है, उसे पाने की। सकारात्मक सोच से ही आगे बढ़ पाता है समाज और देश। यह हमारी संस्कृति की विशेषता रही है कि आशा की जोत हमेशा से जगाए रखती है। आशा की जोत के कारण ही हम नए साल का स्वागत के साथ आगाज करते हैं।

    कुछ अच्छे की सोचते हैं। जो हो गया है उसे भुलाने का प्रयास करते हैं। विराट सांस्कृतिक परंपरा के धनी हमारे देश के युवाओं ने सारी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। अमेरिका सहित दुनिया के बहुत से देश हमारे युवाओं के ज्ञान कौशल से घबराने लगे हैं। गाहे-बेगाहे वे हमारे देश के युवाओं के उनके देश में प्रवेश को सीमित करने का प्रयास करते है। हमारे युवाओं की मेहनत, श्रम शक्ति और ज्ञान-कौशल का लोहा मानते हैं। हमारे वैज्ञानिकों ने अपनी मेहनत से देश को आगे ले जाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। दूसरे देशों के सेटेलाइट हम प्रक्षेपित करने लगे हैं। अग्नि प्रक्षेपन में हम सफल रहे हैं। हमारे सेटलाइट सफलता पूर्वक काम कर रहे हैं। टेक्नालॉजी में हम आत्म निर्भर होते जा रहे हैं। राजनीतिक परिपक्वता में हमारे लोकतंत्र के मुकाबले दुनिया का कोई दूसरा देश नहीं है। आखिर हमारी गौरवशाली विरासत को आगे ले जाने में हम कहां पीछे रहने वाले हैं।

    नया साल 2019 भी जीएसटीई में सुधार की दिशा में आगे बढ़ता ही होगा। चाहे इसका कारण राजनीतिक भले ही हो। दरअसल मई 2019 में होने वाले चुनाव 2019 की सबसे बड़ी घटना होगी। चुनावों के केन्द्र में एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मोदी लहर का पैमाना होगा तो दूसरी और राहुल गांधी व क्रांग्रेस तो तीसरी और अन्य दलों के तीसरे मोर्चें के आकार लेने की स्थिति में आने वाले परिणाम खास होंगें। इतना साफ है कि देशवासियों को 2.019 के लोकतंत्र के यज्ञ में आहुति देने का बड़ा अवसर मिलेगा, चुनाव आयोग के सामने भी निष्पक्ष व स्वतंत्रता और शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न कराने को गुरुतर दायित्व होगा वहीं केन्द्र सरकार द्वारा लोकलुभावन घोषणाओं और नई सरकारों द्वारा कम समय में आमजन का विश्वास जीतने की गुरुतर चुनौती सामने होगी।

    देशवासियों के सामने इन चुनावों में बढ़चढ़कर भाग लेते हुए नई सरकार चुनकर देश की राजनीति को अगले पांच सालों के लिए दशा और दिशा देने का अवसर होगा। माना यह जा रहा है कि नए साल में सरकार की आर्थिक नीति में बदलाव आएगा। आयकर को लेकर लोगों में आशाएं जगी है। सरकार से लोगों की आशाएं बढ़ी है। सकारात्मक सोच के साथ अब शुभकामनाओं और मंगलकामनाओं के बीच हमें देश को आगे ले जाने का संकल्प लेना होगा। आचार-विचार में शुद्धता और नेतिकता का सबक लेना होगा। हमें सकल्प लेना है देश को आगे ले जाने का, शिक्षा, औद्योगिक विकास, रोजगार, बिजली-पानी, सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार का, आधुनिकतम तकनीक को देश के विकास में हिस्सेदार बनाकर आगे बढ़ने के प्रयास करने होंगे ताकि देश विकास की राह पर तेजी से बढ़ सके। नया साल नईस्फूर्ति, नए उत्साह से आगे बढ़ने की राह प्रशस्त करे, यही हमारी मंगल कामना है।

    Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो।