Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: सन् 1967 में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज अपनी जीवोद्धार यात्रा के दौरान सत्संग फरमाते हेतू गांव कैले बांदर जिला भंठिडा पहुँचे। गाँव की साध-संगत खुशी से नाच उठी। साध-संगत ने सत्संग हेतू तैयारियों में पूर्ण सहयोग दिया। सारे गांव की सफाई की गई तथा सड़को पर पानी छिड़का गया। रात्रि को पहला सत्संग हुआ। भजन समाप्ति के उपरांत पूजनीय परम पिता जी ने इस भजन की सुंदर व्याख्या की। सत्संग का कार्यक्रम सारी रात चलता रहा और सभी सत्संग में इतना मंत्रमुग्ध हुए कि सुबह होने का पता ही नहीं चला। MSG Bhandara Month
सारी सांध-संगत प्रेम से बैठी हुई थी। सत्संग के इस प्रेम को देखते हुए परम पिता जी बहुत खुश हुए व अपने अमृतयुक्त वचनों द्वारा अनेक बख्शिशें की। दूसरे दिन फिर सत्संग प्रारंभ हुआ और पंडाल साध-संगत से भरा हुआ था सत्संग के उपरांत सतगुरु जी ने बड़ी संख्या में जीवों को ‘नाम-शब्द’ देकर भवसागर से पार किया । उक्त सत्संग के बाद पूजनीय परम पिता जी ने जब इस गांव में आगामी सत्संग फरमाया तो गांव की साध-संगत का प्रेम देखकर परम पिता जी बहुत खुश हुए और वचन फरमाया,‘‘बेटा! तुम्हारे गाँव का पहला नंबर है।’’
सतगुरु जी ने बहुत प्रसन्न होकर उस गाँव का नाम कैले बांदर से बदलकर ‘नसीबपुरा’ रख दिया और फरमाया,‘‘ बेटा! यह तो नसीबों वाला नगर है।’’ पूजनीय परम पिता जी ने उस समय गाई जा रही कव्वाली में यह पंक्ती जोड़ दी-‘गांव तर गया नसीबपुरा सारा गुरु के साथ तार जोड़ के।’ MSG Bhandara Month













