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    जब कोई प्लान नहीं था तो 713 परिवारों को क्यों उजाड़ा गया : सांसद सैलजा

    Sirsa News
    सांसद कुमारी सैलजा।

    लोकसभा में गूंजा थेहड़ विस्थापितों का मुद्दा

    सरसा (सच कहँू न्यूज)। सरसा की सांसद कुमारी सैलजा (MP Selja) ने सरसा के थेहड़ को लेकर केंद्रीय पर्यटन और कला संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जवाब पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि जब सरकार के पास कोई प्लानिंग नहीं थी और कोई बजट नहीं था तो वहां से 713 परिवारों को क्यों उजाड़ा गया? Sirsa News

    प्रदेश सरकार ने इन परिवारों को वहां से हटाते हुए हुडा सेक्टर-19 के आवासों में अस्थायी रूप से बसाते हुए आश्वासन दिया था कि उन्हें रहने के लिए भूमि उपलब्ध करवाई जाएगी पर पिछले नौ सालों से इन परिवारों को कुछ भी नहीं मिला बल्कि नौ साल से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में वे नरक जैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कुमारी सैलजा ने मांग की कि जिस जगह को खाली कराया है उसे विकसित किया जाए और वहां से हटाए गए परिवारों से किए गए वायदे को पूरा किया जाए। Sirsa News

    सरसा थेहड़ को पुरातत्व विभाग ने 1932 में सूचीबद्ध किया था

    उल्लेखनीय है कि सरसा के थेहड़ को लेकर केंद्रीय पर्यटन और कला संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सदन में कहा कि सरसा थेहड़ को पुरातत्व विभाग ने 1932 में सूचीबद्ध किया था जो 85.5 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। पुरातत्व विभाग ने इस भूमि को खाली कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। बाद में राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में 713 परिवारों को वहां से हटाकर 32 एकड़ भूमि को खाली करा लिया और वहां पर जो कुछ निर्माण था उसे ध्वस्त कर दिया गया।

    इससे पूर्व कुमारी सैलजा ने केंद्रीय मंत्री से पूछा था कि सरसा थेहड़ को खाली कराने के लिए क्या कोई प्लान तैयार किया गया था और भूमि पर विकसित करने का कोई प्लान था? इस पर केंद्रीय मंत्री ने जवाब में कहा था इसका पुरातत्व अस्तित्व बनाने के लिए कोई प्लान नहीं था न ही कोई धनराशि थी और न ही कोई बजट आवंटित किया गया था।

    थेहड़ सीमा का किया जाए पुन: निर्धारण | Sirsa News

    सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र से मांग की कि सरसा थेहड़ की सीमा का पुन: निर्धारण कराया जाए क्योंकि पुरातत्व विभाग जिस 85 एकड़ भूमि को अपना बता रहा है उसकी कोई सीमा नहीं है। जो भूमि खाली कराई गई है उसे विकसित कराया जाए। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि 85.5 एकड़ में एक अधिकतर भूमि ऐसी है जिस पर पिछले कई दशकों से हजारों परिवार रह रहे हंै, जिनके पास भूमि की रजिस्टरी भी है। अगर भूमि पुरातत्व विभाग की बताई जा रही है तो उसकी रजिस्टरी कैसे हुई? कुमारी सैलजा ने मांग की है कि खाली कराई गई भूमि को विकसित किया जाए और जिन परिवारों को थेहड़ से हटाया गया था उन सभी के स्थायी आवास का प्रबंध किया जाए। Sirsa News